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भारत ने ओआईसी की टिप्पणियों को किया खारिज, आतंकवाद पर दी सख्त प्रतिक्रिया

भारत ने जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान में आतंकवादी ढांचे के खिलाफ अपनी कार्रवाई को लेकर ओआईसी की टिप्पणियों को खारिज कर दिया है। लोकसभा सदस्य बिप्लब कुमार देब ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस्लामी सहयोग संगठन के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत को सीमा पार आतंकवाद से अपने नागरिकों की रक्षा करने का अधिकार है। देब ने ओआईसी के अध्यक्ष को पाकिस्तान में हो रही हिंसा पर ध्यान देने की सलाह दी। भारत ने पिछले साल आतंकवाद के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था, जिसका उद्देश्य आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाना था। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया।
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भारत की कड़ी प्रतिक्रिया

(योषिता सिंह) संयुक्त राष्ट्र, 7 अक्टूबर: भारत ने जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान में आतंकवादी ढांचे के खिलाफ अपनी कार्रवाई को लेकर इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) की टिप्पणियों को अस्वीकार कर दिया है। भारत ने कहा कि ओआईसी ‘‘पीड़ित और दोषी के बीच अंतर करने में असमर्थ’’ है। पश्चिम त्रिपुरा से लोकसभा सदस्य बिप्लब कुमार देब ने यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति में ‘अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के उन्मूलन के उपाय’ विषय पर भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य प्रस्तुत किया। देब उस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं, जो संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली से अवगत होने के लिए एक सप्ताह के कार्यक्रम में भाग लेने आया है।


ओआईसी के बयान पर प्रतिक्रिया

त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री देब ने ओआईसी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘मैं ओआईसी के अध्यक्ष के उस बयान का जवाब देना चाहता हूं, जिसमें पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचे के खिलाफ भारत की कार्रवाई का उल्लेख किया गया है। आतंकवादी हमलों की योजना इन्हीं स्थानों से बनाई गई थी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह दुखद है कि बयान देने वाले लोग तथ्य और कल्पना के बीच तथा पीड़ित और दोषी के बीच अंतर नहीं कर पा रहे हैं।’’


भारत का अधिकार

देब ने यह भी कहा कि भारत को पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद से अपने नागरिकों की रक्षा करने का अधिकार है और आतंकवाद में शामिल लोगों को इसके परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने ओआईसी द्वारा जम्मू-कश्मीर का ‘‘अनुचित उल्लेख’’ करने की आलोचना की और कहा, ‘‘ओआईसी के अध्यक्ष को पाकिस्तान द्वारा रावलकोट में किए गए अवैध कब्जे पर ध्यान देना चाहिए, जहां बर्बर हिंसा और हत्याएं हो रही हैं।’’


पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थिति

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पिछले कुछ महीनों से 12 विवादित शरणार्थी सीटों को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनके खिलाफ सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की है। हाल ही में विधानसभा चुनावों में धांधली के आरोप भी लगे हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा की कानूनी मामलों से संबंधित छठी समिति में ओआईसी की ओर से सऊदी अरब ने बयान दिया था। ओआईसी ने ‘‘दक्षिण एशिया में सैन्य तनाव बढ़ने’’ का उल्लेख किया, लेकिन भारत का नाम नहीं लिया।


भारत की कार्रवाई

भारत ने पिछले साल मई में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाना था। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक आतंकवादी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 नागरिकों की जान गई थी। यह हमला ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ द्वारा किया गया था, जो लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा संगठन है।


आतंकवाद का खतरा

ओआईसी के बयान में जम्मू-कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का भी उल्लेख किया गया। देब ने कहा कि भारत अपने ‘‘कड़वे अनुभव’’ से जानता है कि आतंकवाद का खतरा केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि ‘‘लगातार और रोजमर्रा की वास्तविकता’’ है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लोग सीमा पार आतंकवाद का दशकों से सामना कर रहे हैं।’’


आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति

देब ने कहा कि आतंकवाद का हर रूप मानवता के लिए गंभीर खतरा है और यह अंतरराष्ट्रीय शांति, आर्थिक प्रगति, लोकतांत्रिक व्यवस्था और मानवाधिकारों पर असर डालता है। उन्होंने कहा, ‘‘यह हर व्यक्ति के सबसे बुनियादी मानवाधिकार-जीवन के अधिकार- पर हमला करता है। आतंकवाद संयुक्त राष्ट्र के मूल्यों के खिलाफ है।’’


आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक प्रयास

भारत ने वैश्विक आतंकवाद-रोधी प्रयासों में एक ‘‘प्रमुख कमी’’ की ओर भी ध्यान दिलाया, यह बताते हुए कि 1996 में भारत द्वारा पेश किए गए मसौदे के बावजूद अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन (सीसीटीआई) अब तक अस्तित्व में नहीं आया है। देब ने कहा, ‘‘भारत दोहराता है कि सीसीटीआई को शीघ्र अंतिम रूप दिए जाने से आतंकवाद का व्यापक रूप से मुकाबला करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचा मजबूत होगा।’’