भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के भाषण पर कड़ी प्रतिक्रिया दी
संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत की प्रतिक्रिया
भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण का जवाब देते हुए उसकी राजनीतिक और लोकतांत्रिक प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। भारत की स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने राइट ऑफ रिप्लाई का उपयोग करते हुए पाकिस्तान पर आतंकवाद, मानवाधिकारों और जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर कई आरोप लगाए। यह प्रतिक्रिया 26 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान दी गई।
पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर भारत की टिप्पणी
पेटल गहलोत ने पाकिस्तान की लोकतांत्रिक प्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों के बारे में पाकिस्तान की बातें केवल दिखावा हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जिस देश की राजधानी को अपनी जनता से बचाने के लिए किले में तब्दील किया जा रहा हो, उसे लोकतंत्र पर उपदेश नहीं देना चाहिए।
गहलोत ने पाकिस्तान की शासन प्रणाली को "सेना का, सेना द्वारा और सेना के लिए शासन" के रूप में वर्णित किया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के नेता भले ही बदलते रहें, लेकिन असली शक्ति किसके पास है, इस पर कोई संदेह नहीं होना चाहिए।
संविधान संशोधन पर भारत की चिंता
भारत ने पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन का भी उल्लेख किया, जिसमें चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को कानूनी मुकदमों से आजीवन छूट देने का मुद्दा उठाया गया।
कश्मीर पर भारत का स्पष्ट रुख
शहबाज शरीफ के जम्मू-कश्मीर से संबंधित बयानों का जवाब देते हुए भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है।
पेटल गहलोत ने कहा कि यदि पाकिस्तान को कश्मीर पर चर्चा करनी है, तो उसे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की स्थिति पर बात करनी चाहिए। उन्होंने रावलकोट में कथित हत्याओं, हिंसा और बुनियादी अधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया।
भारत ने पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया, जबकि पाकिस्तान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए भारत पर भी आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगाया।
9/11 और ओसामा बिन लादेन का संदर्भ
शहबाज शरीफ द्वारा 2025 के तनाव के दौरान पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका की प्रशंसा पर भारत ने भी प्रतिक्रिया दी। पेटल गहलोत ने 9/11 आतंकी हमलों की 25वीं वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए कहा कि इस संदर्भ को याद रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इन हमलों का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में सैन्य अकादमी के निकट रह रहा था।
आतंकवाद पर भारत की चेतावनी
भारत ने सीमा पार आतंकवाद के संदर्भ में कहा कि वह अपनी रक्षा के अधिकार का उपयोग करेगा। गहलोत ने 7 मई 2025 को शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख किया, जिसे भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई के रूप में बताया।
गहलोत ने कहा कि भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवादियों के पास अब भागने या छिपने की कोई जगह नहीं होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तान आतंकवाद जारी रखता है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
धार्मिक असहिष्णुता पर सवाल
भारत ने शहबाज शरीफ के धार्मिक असहिष्णुता पर बयानों पर भी सवाल उठाए। पेटल गहलोत ने कहा कि जिस देश में ईशनिंदा कानून और कट्टरता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, उसे दूसरे देशों को इस मुद्दे पर सीख नहीं देनी चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ऐसे बयानों के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह नहीं किया जा सकता।
