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भारत पर रूस से तेल खरीदने का असर: अमेरिका की नई टैरिफ योजना

अमेरिका ने रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की योजना बनाई है, जिसमें भारत भी शामिल है। यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति पर गहरा असर डाल सकता है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने जून 2026 में रूस से 4.5 अरब यूरो का कच्चा तेल आयात किया। जानें इस प्रस्तावित विधेयक के संभावित प्रभाव और भारत के लिए चुनौतियाँ क्या हो सकती हैं।
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रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ का खतरा


रूस से कच्चा तेल खरीदने पर अमेरिका की नई नीति


भारत को रूस से कच्चा तेल आयात करने पर फिर से महंगा पड़ सकता है। अमेरिका उन देशों पर आर्थिक कार्रवाई करने की योजना बना रहा है जो रूस से तेल खरीद रहे हैं।


अमेरिकी संसद ने इस संबंध में एक सख्त आर्थिक प्रतिबंध विधेयक पेश किया है, जिसमें प्रस्तावित है कि रूस से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है।


भारत को सूची में प्रमुख स्थान

इस विधेयक में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे प्रमुख तेल खरीदार देशों को शामिल किया गया है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति को विशेष परिस्थितियों में राहत देने का अधिकार भी दिया गया है।


भारत ने 2022 से रूस से सबसे अधिक कच्चा तेल आयात किया है, जिसमें विशेष रियायतें शामिल थीं। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।


जून 2026 में भारत का तेल आयात

जून 2026 में भारत ने रूस से 4.5 अरब यूरो का कच्चा तेल आयात किया, जो कुल ईंधन आयात का 83% है। इस प्रकार, भारत रूस से हाइड्रोकार्बन खरीदने वाला चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है।


अमेरिका का पूर्व का टैरिफ

यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने भारत पर उच्च टैरिफ लगाया है। अगस्त 2025 में भी अमेरिका ने 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जब भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा था।


हालांकि, कुछ महीनों बाद भारत ने अमेरिकी दबाव के आगे झुकते हुए रूस से तेल आयात बंद कर दिया था।