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भारत ब्रिक्स के माध्यम से वैश्विक टेक्नोलॉजी में कदम रख सकता है

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में उद्योग विशेषज्ञों ने भारत की तकनीक को वैश्विक स्तर पर फैलाने की संभावनाओं पर चर्चा की। दक्षिण अफ्रीकी कंपनी के सीईओ ने भारत की तकनीकी प्रगति की सराहना की, जबकि रूसी दूतावास के प्रवक्ता ने भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था पर जोर दिया। इस सम्मेलन में 110 से अधिक रूसी कंपनियों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। जानें और क्या कहा गया इस सम्मेलन में।
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में उद्योग विशेषज्ञों की राय

नई दिल्ली - भारत ब्रिक्स का उपयोग अपनी तकनीक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलाने के लिए कर सकता है, जिससे न केवल भारत बल्कि अन्य सदस्य देशों को भी लाभ होगा। यह जानकारी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान उद्योग विशेषज्ञों ने शुक्रवार को साझा की।


दक्षिण अफ्रीकी कंपनी एमपिलो-एंडे फोर्टिफाइड फूड्स के सीईओ मफुंडो थांगो ने समाचार मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत दक्षिण अफ्रीका की तुलना में अधिक विकसित है। उन्होंने बताया कि भारत में विकसित तकनीक और एग्री-टेक नवाचारों का उपयोग दक्षिण अफ्रीका को एक आधार बनाकर अफ्रीका में बेहतर तरीके से किया जा सकता है। इससे भारत को अपनी तकनीक को वैश्विक स्तर पर ले जाने का अवसर मिलेगा।


भारत में रूसी दूतावास के प्रेस सचिव पेट्र सिजोव ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और यह विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि दोनों देश कई प्रोजेक्ट्स पर मिलकर काम कर रहे हैं, जिसके चलते ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 110 से अधिक रूसी कंपनियां भाग ले रही हैं।


‘एसोसिएशन ऑफ हॉस्पिटैलिटी प्रोफेशनल्स वेलफेयर’ के उपाध्यक्ष अनुपम वोहरा ने ब्रिक्स की अध्यक्षता को भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने कहा, “भारत में पर्यटन क्षेत्र में तेजी आई है। हमारी अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी वृद्धि हो रही है।” ब्रिक्स समूह में ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, चीन, मिस्र, ईरान और यूएई जैसे देश शामिल हैं, जो दुनिया के लगभग 11 से 12 देशों का एक बड़ा गठबंधन बनाते हैं।


हर देश की अपनी प्राथमिकताएं और आर्थिक स्थितियां भिन्न हैं, इसलिए सभी पर समान नियम लागू नहीं हो सकते। उदाहरण के लिए, चीन पर्यटन के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम कर रहा है, जबकि रूस को चल रहे संघर्ष के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ब्रिक्स दुनिया की अर्थव्यवस्था और जनसंख्या के लगभग 60 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।