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भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते से निर्यात में तेजी, पहले दिन 140 मिलियन डॉलर का सामान भेजा गया

भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार समझौता लागू होने से निर्यात में तेजी आई है। पहले दिन ही 140 मिलियन डॉलर का सामान भेजा गया, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्यूटिकल्स शामिल हैं। इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन में शून्य शुल्क पर सामान भेजने की सुविधा मिली है। इसके अलावा, भारतीय स्टील उद्योग को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। जानें इस समझौते के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।
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भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार समझौता लागू


15 जून को लागू हुआ व्यापार समझौता, भारत के 99 प्रतिशत निर्यात पर कोई कर नहीं लगेगा


भारत और ब्रिटेन ने आपसी व्यापार को बढ़ावा देने के लिए व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) लागू किया है। यह समझौता 15 जून से प्रभावी हो गया है। इसके लागू होने से भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन के बाजार में विशेष रियायतें मिलने लगी हैं। अब भारत के लगभग 99% निर्यात को ब्रिटेन में शून्य शुल्क पर पहुंचाने की सुविधा प्राप्त हो गई है। इस कारण पहले दिन ही 140 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का निर्यात किया गया।


50 से अधिक निर्यात खेप भेजी गईं

इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, रत्न एवं आभूषण जैसे उत्पादों की खेपें मुंद्रा, न्हावा शेवा, चेन्नई, मुंबई, कोलकाता और हैदराबाद से ब्रिटेन के लिए रवाना की गईं। पहले दिन ही 20 से अधिक बंदरगाहों, हवाई अड्डों, आईसीडी, एसईजेड और कारखानों से 50 से अधिक निर्यात खेपों को भेजा गया। यह सामान जम्मू, चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई, नोएडा, दिल्ली और कोयम्बतूर जैसे शहरों से भेजा गया।


ब्रिटेन बनेगा भारतीय स्टील का बड़ा बाजार

ब्रिटेन द्वारा मार्च में लागू किए गए स्टील सुरक्षा उपायों ने व्यापार समझौते के लागू होने में बाधा उत्पन्न की थी। लेकिन दोनों देशों के बीच लंबी बातचीत के बाद इस मुद्दे का समाधान निकला और व्यापार समझौता 15 जुलाई से लागू हो गया। इससे भारतीय स्टील उद्योग को बड़ा लाभ होगा, क्योंकि अब भारतीय निर्यातक हर साल 11 लाख टन से अधिक स्टील ब्रिटेन में बिना आयात शुल्क के भेज सकेंगे।


2030 तक द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य 100 अरब डॉलर

व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता और सामाजिक सुरक्षा समझौता लागू होने पर नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि ब्रिटेन के साथ समझौते से 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। समझौते के लागू होने के पहले दिन से विभिन्न क्षेत्रों के निर्यातकों ने शुल्क रियायतों का लाभ उठाना शुरू कर दिया है।