भारत में टनल बोरिंग मशीनों का निर्माण: आत्मनिर्भरता की ओर कदम
टनल बोरिंग मशीनों का विकास
वर्तमान में देश में विभिन्न प्रकार के इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे रेलवे, हाईवे और पावर प्रोजेक्ट्स के लिए टनल बोरिंग मशीनों (TBMs) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। पहले, इन मशीनों को पूरी तरह से आयात करना पड़ता था, लेकिन अब भारत में 8 मीटर व्यास की TBMs का निर्माण शुरू हो चुका है। हाल ही में, 15 मीटर व्यास की मशीनों का भी निर्माण किया जा रहा है। तमिलनाडु में TBM निर्माण का एक संयंत्र स्थापित किया गया है, और जल्द ही 16 मीटर से अधिक व्यास वाली मशीनों का निर्माण भी शुरू होगा। यह दर्शाता है कि भारत TBM के डिजाइन, निर्माण और रखरखाव में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।
चीन ने TBMs और संबंधित उपकरणों के निर्यात पर नियंत्रण लगाने का निर्णय लिया है, जो 18 नवंबर 2026 से लागू होगा। यह निर्णय भारत जैसे देशों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन मशीनों का उपयोग रेलवे, मेट्रो और पहाड़ी क्षेत्रों में सुरंग बनाने में होता है। हालांकि, चीन ने भारत का नाम लेकर सभी निर्यात पर प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन नए नियमों के कारण मशीनों और उनके पुर्जों की आपूर्ति में देरी हो सकती है, जिससे भारत को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ऋषिकेश-करणप्रयाग रेल परियोजना का एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि भारत में TBMs के निर्माण में प्रगति हो रही है। पहले, भारत को इन मशीनों के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब 8 मीटर और 15 मीटर व्यास की मशीनों का निर्माण किया जा रहा है।
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने 19 अक्टूबर को नए निर्यात नियंत्रण की घोषणा की, जिसमें TBMs, उनके विशेष पुर्जे और मरम्मत से जुड़े तकनीक शामिल हैं। इसके अलावा, कठिन पहाड़ी इलाकों में उपयोग होने वाले वॉकिंग एक्सवेटर और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कंक्रीट छिड़कने वाली मशीनों पर भी नियंत्रण लगाया गया है। नए नियमों के तहत, संवेदनशील देशों में इन उपकरणों के निर्यात के लिए अनुमति लेनी होगी।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि चीन ने सभी देशों को TBMs बेचने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। लेकिन निर्यात प्रक्रिया पर सरकारी नियंत्रण बढ़ने से उन देशों के लिए जोखिम उत्पन्न होता है जो इन मशीनों के लिए चीन पर निर्भर हैं। भारत के लिए असली चुनौती यह है कि आवश्यक मशीनें समय पर मिलें ताकि बड़ी परियोजनाओं का कार्य प्रभावित न हो।
टनल बोरिंग मशीनों की आवश्यकता
टनल बोरिंग मशीनें जमीन के भीतर सुरंग बनाने वाली विशाल मशीनें होती हैं। इनका अगला हिस्सा घूमकर चट्टान और मिट्टी को काटता है, जिससे मशीन आगे बढ़ती है। सुरंग की दीवारों को मजबूत करने के लिए कंक्रीट के हिस्से लगाए जाते हैं, जो पहाड़ों या शहरों के नीचे सुरंग बनाने में मदद करते हैं।
भारत में इन मशीनों की आवश्यकता कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में है, जैसे मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना, मेट्रो नेटवर्क और हिमालय क्षेत्रों में रेल संपर्क विकसित करना। यदि किसी मशीन या उसके आवश्यक पुर्जों की आपूर्ति में देरी होती है, तो परियोजना की समय सीमा और लागत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यह स्थिति भारत के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है, खासकर जब चीन ने पहले भी ईवीएम की आपूर्ति में रुकावटों का सामना कराया है।
