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भारत में पॉलीमर नोटों का परीक्षण: 10 और 20 रुपये के नए बदलाव

केंद्र सरकार ने 10 और 20 रुपये के पॉलीमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है, जिससे भारतीय मुद्रा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में इसकी जानकारी दी। पॉलीमर नोट अधिक टिकाऊ और सुरक्षित होते हैं, और इनका उपयोग कई देशों में पहले से हो रहा है। आरबीआई का लक्ष्य 2027-28 तक इन नोटों को प्रचलन में लाना है। जानें इस नई पहल के बारे में और क्या संभावनाएं हैं।
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पॉलीमर नोटों का फील्ड ट्रायल

नई दिल्ली: भारत की मुद्रा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलीमर बैंक नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है। मंगलवार को संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, सरकार ने इन दोनों मूल्यवर्गों के लिए एक-एक अरब (100 करोड़) पॉलीमर नोट जारी करने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है।


वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपने केंद्रीय निदेशक मंडल की सिफारिश पर यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। इस प्रस्ताव में फील्ड ट्रायल के सफल परिणाम मिलने पर इन नोटों को नियमित रूप से जारी करने की योजना भी शामिल है।


सीतारमण ने कहा, "सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। आरबीआई के अनुसार, इन पॉलीमर नोटों को मौजूदा कागज आधारित नोटों के साथ समानांतर रूप से जारी करने का प्रस्ताव है।"


पॉलीमर बैंक नोट विशेष प्रकार के प्लास्टिक से बने होते हैं, जो पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं। ये नमी, धूल और सामान्य घिसावट का बेहतर सामना कर सकते हैं। कई देशों जैसे ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन में पहले से ही पॉलीमर नोटों का उपयोग किया जा रहा है।


इन नोटों की आयु कागजी नोटों से अधिक होती है, जिससे बार-बार नोट छापने की आवश्यकता कम होती है। इसके अलावा, इनमें उन्नत सुरक्षा विशेषताएं जोड़ना भी आसान होता है, जिससे नकली नोटों पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।


निर्मला सीतारमण ने संसद में बताया कि आरबीआई ने सरकार को सूचित किया है कि इन नोटों के लिए आवश्यक खरीद प्रक्रिया अभी प्रारंभिक चरण में है। इसलिए यह बताना संभव नहीं है कि पॉलीमर नोटों को आम जनता के बीच कब तक जारी किया जाएगा और इस परियोजना पर कितना खर्च आएगा।


इस महीने की शुरुआत में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि पॉलीमर नोटों का पायलट प्रोजेक्ट अभी जारी है।


उन्होंने कहा, "पॉलीमर नोटों पर अभी परीक्षण चल रहा है। बाजार में लाने से पहले इन नोटों की पूरी तरह जांच की जाएगी।"


इस दौरान, आरबीआई गवर्नर ने यह भी संकेत दिया कि केंद्रीय बैंक फील्ड ट्रायल के नतीजों का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद ही व्यापक स्तर पर इनके प्रचलन को लेकर अंतिम फैसला करेगा।


संजय मल्होत्रा के अनुसार, आरबीआई का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027-28 तक पॉलीमर नोटों को प्रचलन में लाना है। यदि ट्रायल सफल रहता है, तो यह भारतीय मुद्रा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।