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भारत में स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ: ग्रीन मोबिलिटी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन के शुभारंभ को ऐतिहासिक बताया है। यह ट्रेन ग्रीन मोबिलिटी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो केवल जलवाष्प का उत्सर्जन करती है। जानें इस नई तकनीक के बारे में और कैसे यह भारत को टिकाऊ रेल परिवहन में अग्रणी बनाएगी।
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स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन का ऐतिहासिक शुभारंभ

नई दिल्ली: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को देश में पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन के शुभारंभ को एक ऐतिहासिक घटना बताया। उन्होंने इसे भारत के ग्रीन मोबिलिटी भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना।


सोशल मीडिया पर गोयल ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिंद-सोनीपत मार्ग पर इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। यह ट्रेन 1200 किलोवाट हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम से लैस है और केवल जलवाष्प का उत्सर्जन करती है। यह 10-कोच की इंजीनियरिंग उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत और स्वच्छ, हरित भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


गोयल ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नवाचार-आधारित, नेट-जीरो विकास के दृष्टिकोण के तहत, जिंद में विकसित स्वदेशी हाइड्रोजन भंडारण और रीफ्यूलिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के सहयोग से भारत टिकाऊ रेल परिवहन में अग्रणी देशों में शामिल हो गया है।


हाइड्रोजन ट्रेन पारंपरिक डीजल और बिजली से चलने वाली ट्रेनों से काफी भिन्न है। इसका ऊर्जा प्राप्त करने का तरीका अनूठा है।


यह ट्रेन एक छोटे पावर प्लांट के साथ चलती है, जो प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (पीईएम) फ्यूल सेल के रूप में कार्य करता है। ट्रेन के सिलेंडरों में संग्रहित हाइड्रोजन, आसपास की हवा से मिलने वाली ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया करके बिजली उत्पन्न करता है। इस प्रक्रिया का परिणाम केवल जलवाष्प और ऊष्मा होता है, जिससे कोई धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता।


रेलवे के अनुसार, हाइड्रोजन फ्यूल सेल संचालित ट्रेन का प्रारंभिक संचालन उत्तर रेलवे के जींद-सोनीपत रेलखंड पर किया जाएगा। यह ट्रेन जींद जंक्शन, गोहाना जंक्शन और सोनीपत को जोड़ते हुए कई अन्य स्टेशनों पर भी सेवा प्रदान करेगी।