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भारतवंशी न्यायाधीश नवनीतम नवी पिल्लै को मिला 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार

नवनीतम नवी पिल्लै, जो भारतीय मूल की हैं, को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है। उन्होंने रंगभेद के खिलाफ लड़ाई में नेल्सन मंडेला जैसे नेताओं की सहायता की। पिल्लै का जन्म दक्षिण अफ्रीका में हुआ और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अदालतों में महत्वपूर्ण कार्य किया है। जानें इस पुरस्कार के पीछे की कहानी और नॉर्वे में शांति पुरस्कार के वितरण की प्रक्रिया के बारे में।
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नवनीतम नवी पिल्लै को मिला नोबेल शांति पुरस्कार


नई दिल्ली। नॉर्वे की नोबेल समिति ने 2026 का शांति पुरस्कार भारतवंशी न्यायाधीश नवनीतम नवी पिल्लै को देने की घोषणा की है। पिल्लै, जो दक्षिण अफ्रीका में जन्मी हैं, ने रंगभेद के खिलाफ संघर्ष में नेल्सन मंडेला सहित कई अन्य लोगों की वकील के रूप में सहायता की थी।




उन्हें युद्ध अपराधों और नरसंहार के दोषियों को सजा दिलाने के प्रयासों के लिए यह पुरस्कार दिया जाएगा। नवनीतम पिल्लै का जन्म डरबन, दक्षिण अफ्रीका में भारतीय तमिल परिवार में हुआ था।


अंतरराष्ट्रीय अदालतों में नवनीतम पिल्लै का योगदान


पिल्लै ने दक्षिण अफ्रीका की हाई कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में कार्य किया और उन्होंने रवांडा में नरसंहार से संबंधित मामलों की सुनवाई करने वाली अंतरराष्ट्रीय अदालत में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार प्रमुख भी रह चुकी हैं। रवांडा के एक ऐतिहासिक मामले में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही, जिसमें अदालत ने बलात्कार और यौन हिंसा को नरसंहार के अपराध के रूप में मान्यता दी।


नोबेल शांति पुरस्कार का नॉर्वे में वितरण


अन्य नोबेल पुरस्कार स्वीडन में दिए जाते हैं, जबकि शांति पुरस्कार नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में प्रदान किया जाता है। यह व्यवस्था लगभग 130 साल पुरानी है, जिसे अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी वसीयत में निर्धारित किया था। 1895 में लिखी गई वसीयत में नोबेल ने कहा था कि शांति पुरस्कार का निर्णय नॉर्वे की संसद द्वारा चुनी गई समिति करेगी। उस समय स्वीडन और नॉर्वे एक ही राजा के अधीन थे, लेकिन दोनों की अपनी संसदें और राजनीतिक व्यवस्थाएं थीं।


नोबेल ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्होंने शांति पुरस्कार के लिए नॉर्वे को क्यों चुना। उनकी मृत्यु 1896 में हुई और 1901 से पुरस्कार दिए जाने लगे। उस समय स्वीडन और नॉर्वे एक संघ में थे, लेकिन 1905 में दोनों देश अलग हो गए। फिर भी, नोबेल की वसीयत में शांति पुरस्कार के लिए नॉर्वे को दी गई जिम्मेदारी जारी रही। इसीलिए आज भी भौतिकी, रसायन विज्ञान, चिकित्सा, साहित्य और अर्थशास्त्र के नोबेल स्वीडन में दिए जाते हैं, जबकि शांति का नोबेल नॉर्वे में प्रदान किया जाता है।