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भारतीय नौसेना में शामिल होगा स्वदेशी स्टील्थ युद्धपोत 'महेंद्रगिरि'

भारतीय नौसेना में 11 जुलाई को शामिल होने वाला स्वदेशी स्टील्थ युद्धपोत 'महेंद्रगिरि' अत्याधुनिक तकनीक और मिसाइल प्रणालियों से लैस है। यह युद्धपोत समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता, और खोज एवं बचाव अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जानें इसके विशेषताओं और क्षमताओं के बारे में।
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महेंद्रगिरि का परिचय


स्वदेशी स्टील्थ युद्धपोत 'महेंद्रगिरि' को 11 जुलाई को भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा। यह युद्धपोत अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों और सेंसर से लैस है, जो सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने की क्षमता रखता है। अधिकारियों ने सोमवार को इसकी जानकारी दी।


महेंद्रगिरि की विशेषताएँ

नौसेना के प्रवक्ता ने बताया कि 'महेंद्रगिरि' को मुंबई की मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में डिजाइन और निर्मित किया गया है। यह युद्धपोत वायु रोधी, सतह रोधी और पनडुब्बी रोधी अभियानों में सक्षम है। इसके अलावा, यह समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता, खोज एवं बचाव जैसे अभियानों के लिए भी उपयुक्त है।


यह युद्धपोत स्वदेशी हथियारों और सेंसरों से लैस है, जिसमें उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्धक क्षमता और पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली शामिल हैं।


महेंद्रगिरि में आधुनिक 'कम्बाइंड डीजल ऑर गैस' (सीओडीओजी) प्रणोदन प्रणाली है, जो इसे उच्च गति और लंबी परिचालन क्षमता प्रदान करती है।


इस युद्धपोत का निर्माण 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से किया गया है, जो केंद्र सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' पहल का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।