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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट: बैंकिंग और आईटी शेयरों में बिकवाली

मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट आई, जिसमें बैंकिंग और आईटी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई। सेंसेक्स 561 अंकों की कमी के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी में भी गिरावट आई। कुछ कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली, जबकि कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई। इसके साथ ही, कच्चे तेल की कीमतें भी बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। जानें इस स्थिति का बाजार पर क्या प्रभाव पड़ा है।
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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट


भारतीय शेयर बाजार में गिरावट: मंगलवार को बैंकिंग और आईटी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली के कारण भारतीय शेयर बाजार में गिरावट आई। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 561 अंकों की कमी के साथ 77,054.94 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 158.95 अंकों की गिरावट के साथ 24,052 पर समाप्त हुआ। सेंसेक्स में 0.72% और निफ्टी में 0.62% की कमी आई।


बीएसई पर केवल छह कंपनियों के शेयर हरे निशान में बंद हुए, जबकि 24 कंपनियों के शेयर लाल निशान में रहे। भारती एयरटेल के शेयर में 1.65% की वृद्धि देखी गई, जबकि आईटी कंपनी एचसीएल टेक के शेयर में 4.42% की गिरावट आई।


तेजी दिखाने वाले शेयर

बीएसई पर भारती एयरटेल के अलावा टीसीएस, सन फार्मा, टाटा स्टील, अडानी पोर्ट्स और इटरनल के शेयरों में भी तेजी देखी गई।


गिरावट वाले शेयर

बीएसई पर पावरग्रिड, ICICI बैंक, BEL, एशियन पेंट, रिलायंस, AXIS बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, टाइटन, इन्फोसिस, ट्रेंट, एनटीपीसी, अल्ट्रा सेमको, HDFC बैंक, टेक महिंद्रा, मारुति, ITC, बजाज फाइनेंस, कोटक महिंद्रा बैंक, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा, एलएंडटी, एसबीआईएन, बजाज फिन्सर्व, इंडिगो और HCL टेक में गिरावट दर्ज की गई।


टॉप गेनर और लूजर

टॉप गेनर में भारती एयरटेल, TCS, सन फार्मा, टाटा स्टील, अडानी पोर्ट्स और इटरनल शामिल हैं।


वहीं, टॉप लूजर में एलएंडटी, SBIN, बजाज फिन्सर्व, इंडिगो और HCL टेक शामिल हैं।


कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि

कच्चे तेल की कीमतें मंगलवार को 2% की वृद्धि के साथ प्रति बैरल 80 डॉलर से ऊपर पहुंच गईं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 20% टोल लगाने की घोषणा का कच्चे तेल की कीमतों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।