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भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों को 5 लाख करोड़ का नुकसान

शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का तांडव देखने को मिला, जिससे निवेशकों को 5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट आई, जबकि मेटल और रियल्टी सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित हुए। जानें इस गिरावट के पीछे के कारण और बाजार की वर्तमान स्थिति के बारे में।
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शेयर बाजार में बिकवाली का तांडव

मुंबई: शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का जबरदस्त दबाव देखने को मिला, जिससे दलाल स्ट्रीट पर हाहाकार मच गया। बेंचमार्क निफ्टी 1 प्रतिशत यानी 230 अंक गिरकर 23,255 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि बीएसई सेंसेक्स 0.87 प्रतिशत यानी 637 अंक की गिरावट के साथ 74,265.32 पर बंद हुआ। इस गिरावट के कारण बाजार के लगभग सभी सेक्टर्स में लाल निशान देखने को मिला, जिसमें मेटल और रियल्टी सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित हुए।


निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी

5 लाख करोड़ का नुकसान
इस बिकवाली के चलते निवेशकों की संपत्ति को बड़ा झटका लगा है। बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 483 लाख करोड़ रुपये से घटकर 478 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। बाजार में मंदी का आलम यह रहा कि बीएसई पर सक्रिय 3,365 शेयरों में से 2,376 शेयरों में भारी गिरावट आई, जबकि केवल 809 शेयरों में बढ़त देखने को मिली। इसके अलावा, 120 शेयरों में लोअर सर्किट लगा और 117 शेयर अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गए।


दिग्गज कंपनियों में गिरावट

टॉप 30 में से 22 शेयरों में गिरावट
सेंसेक्स के 30 प्रमुख शेयरों में से केवल 8 शेयरों में मामूली बढ़त देखने को मिली, जबकि 22 शेयरों में भारी गिरावट आई। बजाज फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाटा स्टील के शेयर 2 प्रतिशत से अधिक लुढ़क गए। इसके साथ ही रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक और लार्सन एंड टुब्रो जैसे दिग्गज शेयरों में भी बिकवाली का दबाव बना रहा।


गिरावट के कारण

वैश्विक और घरेलू कारण
इस भारी गिरावट के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं। सबसे पहले, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में वृद्धि, जो 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इससे आयात बिल और महंगाई की चिंताएं बढ़ गई हैं। दूसरी ओर, अमेरिका में महंगाई के मजबूत आंकड़ों के चलते यूएस फेडरल बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ गई है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली ने भी दबाव बढ़ाया है। 10 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने 438 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू निवेशकों की 1,026 करोड़ रुपये की लिवाली भी बेअसर साबित हुई।


मिडकैप और लार्जकैप शेयरों में गिरावट

बिकवाली का असर
चौतरफा बिकवाली के दौर में शिपिंग, रियल्टी और मेटल शेयरों में भारी गिरावट आई। कोचीन शिपयार्ड और गोदरेज प्रॉपर्टीज के शेयर 6-6 प्रतिशत तक टूट गए, जबकि लोधा डेवलपर्स में 5 प्रतिशत की गिरावट आई। मेटल स्पेस में हिंदुस्तान कॉपर और हिंदुस्तान जिंक के शेयर 4-4 प्रतिशत फिसल गए। इसके साथ ही एनएसीएल में 4 प्रतिशत, मुथूट फाइनेंस में करीब 4 प्रतिशत और डिक्सन टेक्नोलॉजीज में 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।