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भारतीय शेयर बाजार में मामूली गिरावट, पश्चिम एशिया के तनाव का प्रभाव

इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में चार सप्ताह की तेजी के बाद मामूली गिरावट आई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। निफ्टी और सेंसेक्स में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी तिमाही के नतीजों से बाजार में सकारात्मकता लौट सकती है। जानें इस गिरावट के पीछे के कारण और भविष्य की संभावनाएं।
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भारतीय शेयर बाजार की स्थिति

मुंबई : लगातार चार सप्ताह की तेजी के बाद, भारतीय शेयर बाजार इस सप्ताह हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई।


इस सप्ताह निफ्टी में 0.26 प्रतिशत की कमी आई, लेकिन अंतिम कारोबारी दिन पर इसमें 1.02 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे यह 24,206 अंक पर बंद हुआ। दूसरी ओर, सेंसेक्स ने शुक्रवार को 827 अंक (1.08 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 77,569 अंक पर समापन किया, फिर भी पूरे सप्ताह में सेंसेक्स 0.25 प्रतिशत कमजोर रहा।


सप्ताह के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआत सकारात्मक माहौल में हुई, लेकिन बाद में पश्चिम एशिया में तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता की अनिश्चितता के कारण वैश्विक बाजारों में बिकवाली का माहौल बन गया, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा। हालांकि, यह गिरावट अधिक समय तक नहीं रही।


एक बाजार विशेषज्ञ के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के लिए बैंकिंग और आईटी कंपनियों के बेहतर कारोबारी अपडेट ने निवेशकों का विश्वास फिर से मजबूत किया और आगामी तिमाही के नतीजों को लेकर सकारात्मक माहौल बना।


सप्ताह के दूसरे भाग में भारतीय शेयर बाजार में अच्छी रिकवरी देखने को मिली, जिसका मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों का 76 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 71-72 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में आना, वैश्विक टेक शेयरों में सुधार और कूटनीतिक प्रयासों के प्रति बढ़ी उम्मीदें थीं।


विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पहली तिमाही में कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहते हैं, तो वित्त वर्ष 2026-27 की कमाई को लेकर विश्वास और मजबूत होगा, जिससे विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का निवेश भी बढ़ सकता है।


एफआईआई सप्ताह के अधिकांश कारोबारी सत्रों में शुद्ध खरीदार रहे और उन्होंने भारतीय शेयर बाजार में लगभग 4,670 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया।


सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो रियल एस्टेट, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और आईटी सेक्टर ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि मीडिया, एफएमसीजी और केमिकल सेक्टर दबाव में रहे।


इस दौरान मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने भी प्रमुख बेंचमार्कों से बेहतर प्रदर्शन किया। रियल्टी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और मेटल शेयरों में खरीदारी से इन दोनों श्रेणियों को मजबूती मिली।


सप्ताह के दौरान निफ्टी मिडकैप-100 में 1.36 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप-100 में 1.26 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।


बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निकट भविष्य में निफ्टी के लिए 24,300 का स्तर प्रमुख प्रतिरोध रहेगा, जबकि 24,100 तत्काल समर्थन के रूप में देखा जा रहा है, इसके बाद 24,000 अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर होगा।


वहीं, बैंक निफ्टी के लिए 57,800-57,700 का दायरा अहम सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 58,200-58,300 के बीच मजबूत रेजिस्टेंस देखने को मिल सकता है।


आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के कॉरपोरेट नतीजों, भारत के महंगाई के आंकड़ों, अमेरिका के कोर महंगाई डेटा और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की टिप्पणियों पर रहेगी।


एक बाजार विशेषज्ञ के अनुसार, हालिया एफओएमसी बैठक के सख्त रुख के बावजूद अमेरिका, यूरोपीय संघ और चीन में महंगाई का दबाव कम हो रहा है और आर्थिक वृद्धि भी धीमी पड़ रही है। ऐसे में उम्मीद बढ़ रही है कि आने वाले समय में प्रमुख केंद्रीय बैंक अपेक्षाकृत नरम मौद्रिक नीति अपना सकते हैं।