भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट, निवेशकों को हुआ बड़ा नुकसान
शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी
मुंबई- भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को चौथे दिन भी गिरावट का सामना किया। दिन के अंत में, सेंसेक्स 125.56 अंक या 0.17 प्रतिशत की कमी के साथ 73,123.83 पर और निफ्टी 87.65 अंक या 0.39 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,600.00 पर बंद हुआ।
इस गिरावट के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यू में लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, विदेशी निवेशकों द्वारा बिकवाली, मिड और स्मॉलकैप शेयरों में भारी गिरावट, और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर चिंता जैसे चार प्रमुख कारण रहे।
बाजार में व्यापक बिकवाली का माहौल था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,263.30 अंक या 2.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ 55,800.65 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 536.45 अंक या 2.94 प्रतिशत की कमी के साथ 17,739.45 पर बंद हुआ।
लगभग सभी प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी मेटल (2.71 प्रतिशत), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (2.63 प्रतिशत), निफ्टी इंडिया डिफेंस (2.60 प्रतिशत), और निफ्टी रियल्टी (2.38 प्रतिशत) जैसे सेक्टरों में सबसे अधिक दबाव देखा गया।
सेंसेक्स में इटरनल, एलएंडटी, टीसीएस, अल्ट्राटेक सीमेंट, और एशियन पेंट्स जैसे शेयरों में बढ़त देखने को मिली, जबकि टाटा स्टील, ट्रेंट, और टेक महिंद्रा जैसे शेयरों में गिरावट आई।
विशेषज्ञों का कहना है कि निफ्टी की तुलना में मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में आई तेज गिरावट मुख्य चिंता का विषय है। वैल्यूएशन से जुड़ी चिंताओं और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार पर दबाव डाला है। इंडिया वीआईएक्स में वृद्धि यह दर्शाती है कि निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि मध्य पूर्व में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रह सकती हैं, जबकि एआई के कारण वैश्विक इक्विटी बाजारों में बिकवाली निवेशकों के जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित कर रही है। महंगाई के रुझान और केंद्रीय बैंकों के कदम बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे। ऐसे में, स्टॉक और सेक्टर-विशेष के अवसरों पर ध्यान केंद्रित करना फायदेमंद हो सकता है।
