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भारतीय शेयर बाजार में सुधार: सेंसेक्स 84,000 के स्तर तक पहुंच सकता है

भारतीय शेयर बाजार में सुधार के संकेत मिल रहे हैं, और विशेषज्ञों का मानना है कि सेंसेक्स इस साल के अंत तक 84,000 के स्तर को छू सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, घरेलू खपत की मजबूती और कंपनियों के आय से जुड़े जोखिमों में कमी इसके मुख्य कारण हैं। एचएसबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के हफ्तों में आर्थिक माहौल में सुधार हुआ है, जिससे कॉर्पोरेट लाभ पर दबाव कम हुआ है। हालांकि, आने वाले महीनों में खपत में कमी की संभावना है। जानें इस रिपोर्ट में और क्या कहा गया है।
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भारतीय शेयर बाजार का सकारात्मक आउटलुक

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में हालिया सुधार देखा गया है, और विशेषज्ञों का मानना है कि सेंसेक्स इस वर्ष के अंत तक 84,000 के स्तर को छू सकता है। इसका मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में कमी, घरेलू खपत की मजबूती और कंपनियों के आय से जुड़े जोखिमों में कमी है। यह जानकारी एक नई रिपोर्ट में सामने आई है।


एचएसबीसी ब्रोकरेज की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के हफ्तों में भारतीय इक्विटी के लिए आर्थिक माहौल में सुधार हुआ है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें अपेक्षा से अधिक तेजी से सामान्य स्तर पर लौट आई हैं।


रिपोर्ट में बताया गया है कि तेल की कीमतों में गिरावट से कॉर्पोरेट लाभ पर दबाव कम हुआ है और कमाई के अनुमानों में कटौती की संभावना भी घट गई है।


इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि अब वैल्यूएशन सामान्य हो गई हैं, और ऊर्जा की कम कीमतों तथा मजबूत खपत ने कमाई के आउटलुक को बेहतर बनाया है।


हालांकि, हालिया भारी खरीदारी के बाद आने वाले महीनों में खपत में कमी आ सकती है, जबकि अल नीनो ग्रामीण मांग के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है।


रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वित्त वर्ष 27 में कमाई में वृद्धि के सामान्य अनुमान (कमोडिटी को छोड़कर) को पहले के 18 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है, और इसमें और कटौती की संभावना है।


एचएसबीसी के विश्लेषकों के अनुसार, आरबीआई के हालिया कदमों ने बॉंड और बैंक डिपॉजिट में विदेशी निवेश को आकर्षित करने में मदद की है, जिससे रुपए को स्थिर करने और विदेशी निवेश की निकासी को कम करने में सहायता मिली है।


विश्लेषकों ने बताया कि विदेशी संस्थागत निवेशक भी शुद्ध खरीदार बन गए हैं, और जुलाई में अब तक लगभग 1.8 अरब डॉलर का निवेश आया है।


हालांकि, ब्रोकरेज ने चेतावनी दी है कि विदेशी निवेश शायद लंबे समय तक बना न रहे, क्योंकि वैश्विक निवेशक एक बार फिर अन्य बाजारों में एआई से जुड़े अवसरों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।


फिर भी, उन्हें उम्मीद है कि घरेलू निवेशकों की मांग इक्विटी के लिए मजबूत बनी रहेगी।


इसके अतिरिक्त, ब्रोकरेज ने अपनी रिपोर्ट में भारत के प्राइवेट बैंकों, उपभोक्ता वस्तुओं, रियल एस्टेट, कमोडिटी और कुछ औद्योगिक कंपनियों को प्राथमिकता दी है। हालांकि, एआई से जुड़ी चिंताओं के कारण सॉफ्टवेयर सेवा क्षेत्र के प्रति सतर्कता बरती जा रही है, भले ही इस क्षेत्र के वैल्यूएशन में सुधार हुआ है।