भोपाल में किसानों का प्रदर्शन समाप्त, सरकार ने उठाए कदम
किसानों का आंदोलन खत्म, सरकार से मिली सहमति
भोपाल, मध्य प्रदेश में संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आयोजित किसानों का प्रदर्शन अब समाप्त हो गया है। सरकार और किसान संगठनों के बीच हुई वार्ता के परिणामस्वरूप कई मुद्दों पर सहमति बनी। किसानों की मुख्य मांग मूंग की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि और खाद वितरण के लिए ई टोकन प्रणाली को लेकर थी। सरकार ने इन मुद्दों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके चलते किसानों ने धरना समाप्त करने का निर्णय लिया।
मूंग की खरीद में वृद्धि से विवाद का समाधान
किसानों का आंदोलन मूंग की MSP पर खरीद को लेकर शुरू हुआ था। उनका कहना था कि रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद सीमित खरीद के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा था। सरकार ने अब हर योग्य किसान की 60 प्रतिशत उपज MSP पर खरीदने का प्रस्ताव रखा है, जबकि पहले यह सीमा 25 प्रतिशत थी। इसके साथ ही खरीद और स्लॉट बुकिंग की तारीखों में भी वृद्धि की गई है।
खाद वितरण में ई टोकन प्रणाली पर रोक
किसानों की दूसरी प्रमुख मांग खाद वितरण में लागू ई टोकन प्रणाली को लेकर थी। किसानों का आरोप था कि इस प्रणाली के कारण उन्हें समय पर खाद नहीं मिल पा रही थी। सरकार ने इस प्रणाली को फिलहाल बंद करने का निर्णय लिया है। कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी, जो इस व्यवस्था की समीक्षा कर सुधार के सुझाव देगी।
नर्मदापुरम से भोपाल तक किसानों का मार्च
किसानों ने 27 जुलाई को नर्मदापुरम से भोपाल के लिए किसान क्रांति पदयात्रा शुरू की थी। लगभग दो हजार किसान ट्रैक्टर ट्रॉलियों और आवश्यक सामान के साथ राजधानी की ओर बढ़े। 28 जुलाई को वे भोपाल की सीमा तक पहुंचे और प्रदर्शन जारी रखा। 29 जुलाई को किसानों ने सड़कों पर डेरा डालकर सरकार पर अपनी मांगें मानने का दबाव बनाया।
सरकार और किसानों के बीच बनी सहमति
लगातार बातचीत के बाद सरकार और किसान संगठनों के बीच सहमति बनी। सरकार ने मूंग की खरीद बढ़ाने, तारीखों को आगे बढ़ाने और किसानों की अन्य मांगों पर सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया। इन आश्वासनों के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन वापस लेने की घोषणा की। इसके साथ ही भोपाल में कई दिनों से चल रहा किसान धरना समाप्त हो गया और किसान अपने घरों की ओर लौटने लगे।
