मद्रास हाईकोर्ट ने 'जन नायगन' पायरेसी मामले में दो आरोपियों की जमानत खारिज की
पायरेसी विवाद में नया मोड़
चेन्नई (News Media); साउथ सिनेमा के मशहूर अभिनेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की फिल्म 'जन नायगन' के पायरेसी मामले में विवाद बढ़ता जा रहा है। मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में इस मामले में दो आरोपियों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
सुनवाई के दौरान, चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने अदालत को बताया कि फिल्म 'जन नायगन' का पायरेटेड संस्करण अब तक लगभग 1.2 करोड़ यानी 12 मिलियन दर्शकों द्वारा देखा जा चुका है। यह फिल्म अभी तक आधिकारिक रूप से सिनेमाघरों में प्रदर्शित नहीं हुई है और इसे सेंसर बोर्ड से अंतिम स्वीकृति भी नहीं मिली है।
यह मामला तब शुरू हुआ जब केवीएन प्रोडक्शंस ने फिल्म के ऑनलाइन लीक होने की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद, चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और इस पायरेसी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 21 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। जांच के दौरान कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि दो आरोपी अब भी फरार हैं।
गिरफ्तार आरोपियों में रजनी और जयप्रकाश ने मद्रास हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। जब यह मामला न्यायमूर्ति सी. कुमारप्पन के समक्ष आया, तो पुलिस ने अदालत के सामने पूरे मामले की गंभीरता को विस्तार से प्रस्तुत किया।
पुलिस ने अदालत को बताया कि इस नेटवर्क के सदस्यों ने पहले फिल्म की डिजिटल फाइलें प्राप्त कीं और फिर उन्हें विभिन्न माध्यमों से जोड़कर एक पूर्ण पायरेटेड संस्करण तैयार किया। इसके बाद इसे इंटरनेट पर अपलोड किया गया, जिससे यह तेजी से पायरेसी वेबसाइटों और प्लेटफार्मों तक पहुंच गया। यह पूरा ऑपरेशन इतनी तेजी से हुआ कि फिल्म के रिलीज से पहले ही करोड़ों लोग इसे देख चुके थे।
सरकारी पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि इस मामले में जांच अभी पूरी नहीं हुई है और कई महत्वपूर्ण सबूतों की जांच बाकी है। इसी आधार पर पुलिस ने आरोपियों को जमानत देने का विरोध किया। अदालत ने पुलिस की इन दलीलों को गंभीरता से लेते हुए दोनों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
यह मामला 9 अप्रैल 2026 की रात से शुरू हुआ था, जब 'जन नायगन' के कुछ क्लिप्स और बाद में पूरी फिल्म इंटरनेट पर लीक हो गई थी। इसके बाद प्रोडक्शन हाउस ने तुरंत हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अवैध स्ट्रीमिंग रोकने के लिए आदेश प्राप्त किया। कोर्ट ने इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को भी निर्देश दिए थे कि वे ऐसी वेबसाइटों और लिंक को ब्लॉक करें, जहां फिल्म अवैध रूप से उपलब्ध थी।
