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मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता विधेयक 2026 पेश, मुस्लिम महिलाओं को मिलेगा लाभ

मध्य प्रदेश सरकार ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक 2026 पेश किया है, जिसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। मुख्यमंत्री मोहन यादव का कहना है कि यह विधेयक विशेष रूप से मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक और हलाला जैसी प्रथाओं से राहत दिलाने में मदद करेगा। विधेयक में लिव इन रिलेशनशिप के लिए भी प्रावधान हैं, और यह बच्चों को समान कानूनी अधिकार देने का वादा करता है। राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है, जिसमें कांग्रेस ने सरकार पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का आरोप लगाया है।
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समान नागरिक संहिता विधेयक का प्रस्ताव


भोपाल: मध्य प्रदेश की सरकार ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक 2026 को पेश किया है। इस पर चर्चा मंगलवार को होगी। सरकार का कहना है कि इसका मुख्य उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि यह कानून विशेष रूप से मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक और हलाला जैसी प्रथाओं से राहत दिलाने में सहायक होगा।


विधेयक की मुख्य बातें

इस विधेयक में तीन तलाक और हलाला को अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा, एक से अधिक विवाह पर रोक लगाने का भी प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि यूसीसी लागू होने के बाद सभी धर्मों के लोगों के लिए विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य होगा, हालांकि अनुसूचित जनजातियों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।


मुख्यमंत्री का दावा

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यूसीसी का सबसे अधिक लाभ मुस्लिम महिलाओं को होगा। उनके अनुसार, इस कानून से महिलाओं को समान अधिकार और कानूनी सुरक्षा मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि जब सरकार ने यूसीसी के मसौदे पर सुझाव मांगे थे, तब बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं ने इसका समर्थन किया था।


लिव इन रिलेशनशिप के लिए प्रावधान

विधेयक में लिव इन रिलेशनशिप के लिए भी स्पष्ट प्रावधान हैं। इसके अनुसार, लिव इन संबंध में रहने वाले जोड़ों को एक महीने के भीतर अपना पंजीकरण कराना होगा। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें तीन महीने तक की सजा का सामना करना पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि इससे ऐसे संबंधों में रहने वाले लोगों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।


यूसीसी विधेयक में अन्य प्रावधान

यूसीसी विधेयक में लिव इन संबंध से जन्मे बच्चों को वैधानिक दर्जा देने का भी प्रस्ताव है। इसके साथ ही जैविक, गोद लिए गए, सरोगेसी और सहायक प्रजनन तकनीक से जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी अधिकार और उत्तराधिकार देने का प्रावधान किया गया है। यदि लिव इन संबंध में रहने वाला पुरुष अपनी महिला साथी को छोड़ देता है, तो महिला अदालत से भरण पोषण की मांग कर सकेगी, जैसे कि विधिक पत्नी कर सकती है।


राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस विधेयक को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने सरकार पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का आरोप लगाया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार यूसीसी को जल्द लागू करने की बात कर रही है, लेकिन अन्य सामाजिक और आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर चुप है। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि यह कानून सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।