महंगाई के बीच लोगों ने गैस सिलेंडर को बनाया चूल्हा
महंगाई और गैस संकट का सामना
लखनऊ। देश में बढ़ती महंगाई और एलपीजी गैस की कमी के चलते, लोगों ने अपनी रचनात्मकता का परिचय देते हुए अद्भुत आविष्कार किए हैं। खाली गैस सिलेंडरों को फेंकने के बजाय, उन्हें लकड़ी और कोयले से जलने वाले पारंपरिक चूल्हों में बदल दिया गया है। यह भारतीय जुगाड़ का एक अनोखा उदाहरण है। जब रसोई का बजट बिगड़ता है और गैस सिलेंडर आम आदमी की पहुँच से बाहर हो जाते हैं, तो लोग अपनी जरूरत के अनुसार ऐसे शानदार समाधान खोज लेते हैं।
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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आपदा में आविष्कार होता है। उन्होंने कहा कि महंगी गैस के चलते, जिस सिलेंडर से चूल्हा जलता था, उसे ही चूल्हा बना लिया गया है।

महंगी गैस के चलते, जब लोग पुराने एलपीजी सिलेंडरों को काटकर लकड़ी या कोयले वाले चूल्हे में बदल रहे हैं, तो यह सच में आपदा में आविष्कार का एक उदाहरण है। पुराने सिलेंडरों को काटकर पोर्टेबल 'वुड-स्टोव' में बदल दिया गया है। इन लोहे के सिलेंडरों का मेटल बहुत मजबूत होता है, जिससे ये चूल्हे लंबे समय तक चलते हैं।

हाल ही में, सरकार ने घरेलू गैस के दाम में तीसरी बार वृद्धि की है, जिससे आम जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रयागराज में एक परिवार ने गैस सिलेंडर को काटकर चूल्हा बना लिया है। इस चूल्हे पर रोटियां बनाते हुए महिलाएं नजर आई हैं। अखिलेश यादव ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा किया है।
वीडियो में प्रयागराज की साक्षी यादव चूल्हे पर रोटी बनाते हुए कहती हैं कि पहले जब गैस सिलेंडर का दाम 450 रुपये था, तब भी हाय तौबा मचती थी। अब यह लगभग 1000 रुपये हो गया है, जिससे मिडिल क्लास परिवारों के लिए बहुत मुश्किल हो गई है।
साक्षी यादव का अनुभव
साक्षी यादव ने बताया कि गैस के दाम बढ़ने से उन्हें बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि उनका परिवार बड़ा है। एक सिलेंडर में उनका काम नहीं चल पाता है। बढ़ती महंगाई के कारण उनका बजट बिगड़ गया है।
बच्चों के लिए टिफिन में चिप्स
परिवार की एक अन्य महिला ने कहा कि उनके पास खाली सिलेंडर हैं और गैस नहीं मिल पाई, इसलिए उन्होंने इसे काटकर चूल्हा बना दिया है। गैस मिलने में लंबा समय लगता है, जिससे उन्हें बच्चों को टिफिन में चिप्स और सेब देना पड़ा।
