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महंगाई में फिर से उछाल, थोक मूल्य सूचकांक 9.68% पर पहुंचा

हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में थोक महंगाई दर 9.68% तक पहुंच गई है, जो कि अप्रैल के मुकाबले एक बड़ी वृद्धि है। ईंधन, बिजली और कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इस महंगाई के चलते आम जनता को अपने घरेलू बजट में और अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। जानें इस स्थिति के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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महंगाई में फिर से उछाल, थोक मूल्य सूचकांक 9.68% पर पहुंचा

महंगाई का नया झटका

नई दिल्ली: देश की आम जनता को महंगाई के मोर्चे पर एक बार फिर से बड़ा झटका लगा है। यदि आपको लगता था कि बाजार में जल्द ही सामान की कीमतें कम होंगी और घरेलू बजट में कुछ राहत मिलेगी, तो आपकी ये उम्मीदें फिलहाल धूमिल हो गई हैं। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी किए गए थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के नवीनतम आंकड़ों ने सरकार और आम उपभोक्ताओं की चिंताओं को बढ़ा दिया है। थोक बाजार में महंगाई की दर में इतनी तेजी से वृद्धि हुई है कि आने वाले दिनों में हर परिवार का बजट प्रभावित होना लगभग तय है।


महंगाई में अप्रत्याशित वृद्धि


सोमवार को मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों ने स्पष्ट कर दिया है कि महंगाई का ग्राफ नीचे आने के बजाय तेजी से ऊपर चढ़ रहा है। मई 2026 में देश की थोक महंगाई दर बढ़कर 9.68 प्रतिशत के चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। यह आंकड़ा इसलिए भी अधिक चिंताजनक है क्योंकि एक महीने पहले अप्रैल 2026 में यह दर 8.26 प्रतिशत थी। थोक बाजार में आई इस भारी वृद्धि का सीधा असर खुदरा बाजार पर भी देखने को मिलेगा, जिसका अर्थ है कि आने वाले दिनों में सामान खरीदने के लिए आपको अधिक खर्च करना पड़ेगा।


ईंधन और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि


थोक महंगाई में आए इस चिंताजनक उछाल का मुख्य कारण ईंधन, बिजली और कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि है। आंकड़ों के अनुसार, ईंधन और बिजली क्षेत्र में थोक महंगाई दर अप्रैल के 24.89 प्रतिशत से बढ़कर मई में 30.33 प्रतिशत पर पहुंच गई है। वहीं, कच्चे तेल की स्थिति और भी गंभीर है। कच्चे तेल की महंगाई मई में 61.51 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जो अप्रैल में 56.31 प्रतिशत थी। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि इन आवश्यक क्षेत्रों में बढ़ती कीमतों ने पूरे बाजार में महंगाई की आग भड़का दी है।