मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भारत में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई की निंदा की
पुलिस की कठोर कार्रवाई पर चिंता
(योषिता सिंह) संयुक्त राष्ट्र, 20 अक्टूबर - संयुक्त राष्ट्र के 20 से अधिक मानवाधिकार विशेषज्ञों ने हाल ही में नयी दिल्ली और अन्य भारतीय शहरों में युवाओं द्वारा आयोजित शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के खिलाफ पुलिस की बार-बार की गई कठोर कार्रवाई पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अधिकारियों से अनुरोध किया है कि वे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करें और इसकी रक्षा करें। जिनेवा में जारी एक बयान में, विशेषज्ञों ने कहा कि यह कार्रवाई एक व्यापक और चिंताजनक प्रवृत्ति को दर्शाती है।
शांतिपूर्ण सभाओं पर पाबंदियों का विरोध
विशेषज्ञों ने भारतीय अधिकारियों से बार-बार आग्रह किया है कि वे शांतिपूर्ण सभाओं पर अनुचित पाबंदियों को समाप्त करें, अत्यधिक बल प्रयोग को रोकें, मनमानी गिरफ्तारियों और लोगों के गायब होने की घटनाओं को खत्म करें। उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीनों में नयी दिल्ली और अन्य क्षेत्रों में युवाओं के नेतृत्व वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई से वे चिंतित हैं।
मानवाधिकारों के उल्लंघन की जांच की मांग
उन्होंने अधिकारियों से अपील की है कि वे इन प्रदर्शनों के दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों में न्याय सुनिश्चित करें। मानवाधिकार विशेषज्ञों ने कहा कि उन्हें अत्यधिक बल प्रयोग को तुरंत समाप्त करने, लोगों के इकट्ठा होने पर लगाई गई पाबंदियों को हटाने, डिजिटल निगरानी के दुरुपयोग से बचने और इंटरनेट बंद करने जैसे कदमों से परहेज करने की आवश्यकता है।
स्वतंत्र जांच की आवश्यकता
उन्होंने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के आचरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि जवाबदेही और न्याय सुनिश्चित किया जा सके और पीड़ितों को मुआवजा दिया जा सके। बयान जारी करने वाले मानवाधिकार विशेषज्ञों में जीना रोमेरो, लियोपोल्डो माल्डोनाडो गुटिरेज, एंड्रिया बोलानोस वर्गास, पाउ पेरेज सालेस और रीम अलसालेम शामिल हैं।
