मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष और सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन पर हमला
मिडिल ईस्ट में संघर्ष का बढ़ता दायरा
मिडिल ईस्ट में युद्ध का प्रभाव तेजी से फैल रहा है, और अब हमलों का केंद्र केवल ईरान, इजराइल या यमन तक सीमित नहीं रह गया है। हाल ही में, सऊदी अरब की एक महत्वपूर्ण तेल पाइपलाइन पर ड्रोन से हमला किया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई ड्रोन इराक से आए और उन्होंने सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्रों को लाल सागर के यानबू बंदरगाह से जोड़ने वाली पाइपलाइन को निशाना बनाया। इस हमले के बाद, पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है, जिससे कुछ लोगों के घायल होने की भी खबरें आई हैं। यह पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हॉर्मोस स्ट्रेट के खतरे से बचाते हुए तेल को लाल सागर के माध्यम से भेजने की सुविधा प्रदान करती है। ऐसे में, इस वैकल्पिक मार्ग पर हमले ने सऊदी अरब की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर संभावित प्रभाव
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लाल सागर तक तेल पहुंचाने वाले मार्ग और बंदरगाह भी खतरे में आते हैं, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ेगा, जिससे कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इसी बीच, ईरान के दक्षिण-पूर्वी प्रांत सिस्तान बलूचिस्तान के सरावान क्षेत्र में भी हिंसक झड़पों की खबरें आई हैं। बताया गया है कि ईरानी सुरक्षा बलों और एक सशस्त्र समूह के बीच संघर्ष हुआ। यह झड़प तब शुरू हुई जब सुरक्षा बलों ने एक घर पर छापा मारा, जिसे हथियारबंद लोगों का ठिकाना माना जा रहा था। इस प्रकार, एक ओर ईरान में सुरक्षा बलों और सशस्त्र समूहों के बीच संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में तेल स्थलों और महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों पर हमले भी तेज हो रहे हैं।
यमन में स्थिति और सऊदी अरब के हवाई हमले
शुक्रवार को, सऊदी अरब के हवाई हमलों ने यमन के मोखा एयरपोर्ट को निशाना बनाया। यह हमला उस समय हुआ जब ईरान समर्थित हूती विद्रोही एक दिन पहले ही इस रणनीतिक बंदरगाह शहर में दाखिल हुए थे। मोखा में हूतियों की एंट्री को उनकी सबसे बड़ी क्षेत्रीय बढ़त के रूप में देखा जा रहा है। मोखा की भौगोलिक स्थिति इसे महत्वपूर्ण बनाती है, क्योंकि यह बाब अल मंदीब जलडमरू मध्य के निकट है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, और रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 12% वैश्विक सामान इसी जल डमरू मध्य से गुजरता है। हूतियों का मोखा के करीब पहुंचना केवल यमन के संघर्ष का मामला नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव विश्व स्तर पर शिपिंग और तेल गैस की आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
