मुंबई नगर निगम में भ्रष्टाचार के मामलों का बड़ा खुलासा
भ्रष्टाचार के मामलों की चौंकाने वाली जानकारी
मुंबई: देश के प्रमुख नगर निकायों में से एक मुंबई नगर निगम में भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों का एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा दर्ज मामलों में नगर निगम के 207 अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं।
सेवा में कार्यरत और सेवानिवृत्त कर्मचारी
इनमें से 112 अधिकारी और कर्मचारी अभी भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि 68 कर्मचारी अंतिम निर्णय से पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं। ये आंकड़े 30 अप्रैल 2026 तक के हैं। आरटीआई के अनुसार, 207 आरोपितों में से केवल 27 को निलंबित किया गया है।
जांच की स्थिति पर सवाल
जांच में क्या आया सामने?
इसका अर्थ है कि अधिकांश आरोपी या तो अभी भी कार्यरत हैं या जांच पूरी होने से पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं। यह स्थिति भ्रष्टाचार के मामलों में जवाबदेही और जांच प्रक्रिया की गति पर गंभीर प्रश्न उठाती है।
द यंग व्हिसलब्लोअर्स फाउंडेशन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता जीतेंद्र घाडगे ने कहा कि लंबित जांच के कारण भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों का उद्देश्य कमजोर हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हर मामले के निपटारे के लिए एक निश्चित समय सीमा होनी चाहिए और अभियोजन स्वीकृति पर जल्द निर्णय लिया जाना चाहिए।
भ्रष्टाचार के मामले और उनकी लंबाई
पहले का क्या है मामला?
आरटीआई के अनुसार, कई भ्रष्टाचार के मामले वर्षों से लंबित हैं। सबसे पुराना मामला 2005 का है, और कुछ मामलों में दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अंतिम निर्णय नहीं हो सका है। भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल रिश्वतखोरी का मामला नहीं, बल्कि जांच प्रणाली की गंभीर कमजोरी को भी दर्शाता है।
आंकड़ों के अनुसार, नगर निगम का इंजीनियरिंग विभाग सबसे अधिक प्रभावित है। इसमें 33 उप अभियंता, 13 सहायक अभियंता, 13 कनिष्ठ अभियंता और कई वरिष्ठ इंजीनियर शामिल हैं। यह विभाग सड़कों, नालों, भवनों और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये खर्च करता है।
आरटीआई से और क्या जानकारी मिली?
आरटीआई से और क्या आया सामने?
आरटीआई से यह भी स्पष्ट हुआ कि भ्रष्टाचार के आरोप केवल वरिष्ठ अधिकारियों तक सीमित नहीं हैं। आरोपितों में 48 सफाई कर्मचारी, 24 मजदूर, 6 मुकादम, 6 चपरासी और अन्य फील्ड कर्मचारी भी शामिल हैं। इसके अलावा, रिश्वत के मामलों में अभियोजन स्वीकृति से जुड़े छह प्रस्ताव अभी भी लंबित हैं, जिनमें से कुछ 2024 से लंबित हैं।
कोविड-19 महामारी के दौरान पहले निलंबित किए गए 43 कर्मचारियों को आवश्यक सेवाओं के लिए फिर से काम पर रखा गया था। हालांकि, नगर निगम ने उनकी पहचान सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है, यह कहते हुए कि इससे चल रही जांच प्रभावित हो सकती है।
