मुजफ्फरपुर में किसानों के लिए नया अवसर: कोल्ड प्रेस तेल मिल योजना
किसानों और उद्यमियों के लिए नई संभावनाएं
मुजफ्फरपुर के किसानों, युवा उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों के लिए एक नई आय का स्रोत खुला है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत, मुजफ्फरपुर को देश के 24 प्रमुख तिलहन उत्पादक जिलों में शामिल किया गया है। इस योजना के तहत, जिले में कोल्ड प्रेस तेल मिलों की स्थापना और तेल की पैकेजिंग को बढ़ावा दिया जाएगा।
राज्य सरकार की वित्तीय सहायता
राज्य सरकार ने कोल्ड प्रेस तेल निष्कर्षण मिल और पैकेजिंग को बढ़ावा देने के लिए 4 करोड़ 97 लाख 60 हजार रुपये की स्वीकृति दी है। योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर तिलहन का प्रसंस्करण बढ़ाना और किसानों को अपनी उपज से अधिक आय का अवसर प्रदान करना है।
अनुदान की जानकारी
इस योजना के तहत, 10 एचपी या उससे अधिक क्षमता वाली कोल्ड प्रेस तेल मिलों पर आर्थिक सहायता उपलब्ध होगी। सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को अधिकतम 2 लाख रुपये या परियोजना लागत का 40 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। वहीं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लाभार्थियों को 2.50 लाख रुपये या परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा।
पैकेजिंग पर भी सहायता
योजना में केवल तेल निकालने वाली मशीनों पर ही सहायता नहीं दी जाएगी, बल्कि उत्पाद की पैकेजिंग को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। सामान्य वर्ग के लिए पैकेजिंग इकाई पर 1.20 लाख रुपये और एससी-एसटी वर्ग के लाभार्थियों के लिए 1.50 लाख रुपये तक का अनुदान निर्धारित किया गया है।
बिहार में इकाइयों की स्थापना
पूरे बिहार में कुल 298 इकाइयों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। जिला कृषि पदाधिकारी भारत भूषण के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक तरीके से शुद्ध तेल का उत्पादन बढ़ाना है।
किसान खुद निकाल सकेंगे ब्रांडेड तेल
कोल्ड प्रेस मिल स्थापित होने के बाद, किसान अपनी तिलहन फसल से स्वयं तेल निकाल सकेंगे। इसके बाद, तेल की ब्रांडेड पैकिंग करके इसे बाजार में बेचा जा सकेगा। इससे किसानों को अपनी उपज का मूल्य बढ़ाने में मदद मिलेगी।
योजना का लाभ उठाने के लिए आवश्यकताएँ
योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदकों के पास उद्यम पंजीकरण, जीएसटी और एफएसएसएआई लाइसेंस होना अनिवार्य है। योजना स्वीकृत होने के बाद, लाभार्थी को एक महीने के भीतर बैंक ऋण स्वीकृत कराना होगा। इसके बाद, दूसरे महीने में मशीन की खरीद करनी होगी। मशीन स्थापित होने के बाद, दो से तीन महीने के भीतर उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इस प्रकार, यह योजना किसानों और स्थानीय उद्यमियों को तिलहन उत्पादन, प्रसंस्करण और ब्रांडिंग से आय का अवसर प्रदान कर सकती है।
