मोहन भागवत का लंदन दौरा: भारतीय समुदाय से संवाद और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिश
मोहन भागवत का लंदन आगमन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत गुरुवार को लंदन पहुंचे। यह यात्रा उनके तीन देशों के दौरे का अंतिम चरण है, जिसमें वह पहले अमेरिका और कनाडा का दौरा कर चुके हैं। आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में यह यात्रा संगठन के वैश्विक संपर्क अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भारतीय समुदाय के साथ संवाद
लंदन में मोहन भागवत के कार्यक्रमों में भारतीय समुदाय के सदस्यों से मुलाकात और संवाद शामिल है। सप्ताहांत में, वह ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के एक बड़े आयोजन को संबोधित करने की संभावना रखते हैं।
सरकार और लोगों के बीच संवाद का महत्व
आरएसएस के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि भारत और अन्य देशों के बीच संबंध केवल सरकारी स्तर पर कूटनीतिक बातचीत तक सीमित नहीं होने चाहिए। लोगों के बीच संवाद और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना भी आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि आरएसएस संस्कृति और सभ्यता पर आधारित दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है, और इस प्रकार वैश्विक स्तर पर संवाद बढ़ाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। यह दौरा इंटीग्रल नामक संगठन के निमंत्रण पर हो रहा है।
हिंदुत्व पर पश्चिमी धारणा
लंदन में हिंदुत्व के बारे में पश्चिमी अकादमिक जगत में मौजूद धारणाओं पर सवाल पूछे जाने पर, आंबेकर ने कहा कि इस विषय पर कई गलतफहमियां हैं। उन्होंने कहा कि भारत को केवल एक राजनीतिक राष्ट्र-राज्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह एक सांस्कृतिक अवधारणा भी है।
आंबेकर ने हिंदुत्व को किसी एक धर्म तक सीमित मानने से इनकार किया और कहा कि यह सभी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के प्रति सम्मान और सत्य में विश्वास पर आधारित है।
ब्रिटेन में मुलाकातों का कार्यक्रम
सुनील आंबेकर ने बताया कि इस सप्ताह मोहन भागवत विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण लोगों से मुलाकात करेंगे। उन्होंने लंदन के विल्सडन में स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर का दौरा भी किया है। इन मुलाकातों का उद्देश्य भारत और ब्रिटेन के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना है।
310 संगठनों का समर्थन
आंबेकर ने दावा किया कि ब्रिटेन में 100 से अधिक संगठनों ने मोहन भागवत का स्वागत किया है और उनके कार्यक्रमों में सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि विभिन्न समुदायों के नेताओं के साथ एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें 310 संगठनों का समर्थन प्राप्त है।
तीन देशों के दौरे का महत्व
आरएसएस के 100 साल पूरे होने के अवसर पर मोहन भागवत का अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन का दौरा संगठन के वैश्विक संपर्क अभियान के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ संवाद के अलावा भारत की संस्कृति, सभ्यता और आरएसएस की विचारधारा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है।
