मोहाली में रियल एस्टेट संकट: जांच के दायरे में एक दर्जन से अधिक प्रोजेक्ट
मोहाली में रियल एस्टेट की स्थिति
मोहाली: पंजाब के मोहाली में रियल एस्टेट क्षेत्र एक बार फिर चर्चा में है। प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग की जांच के चलते एक दर्जन से अधिक हाउसिंग प्रोजेक्टों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इस जांच का प्रभाव केवल बिल्डरों पर ही नहीं, बल्कि हजारों निवेशकों पर भी पड़ने की संभावना है।
सूत्रों के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय ने ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी से पिछले पांच वर्षों में जारी किए गए चेंज ऑफ लैंड यूज (CLU) से संबंधित रिकॉर्ड मांगे हैं। बताया जा रहा है कि जिन प्रोजेक्टों की जांच की जा रही है, वे पहले से ही आयकर विभाग और अन्य एजेंसियों की निगरानी में हैं। इन परियोजनाओं से जुड़े दस्तावेज भी जांच एजेंसियों के पास पहुंच चुके हैं।
प्रभावित परियोजनाओं का स्थान
न्यू चंडीगढ़ और जीरकपुर क्षेत्र में सबसे अधिक प्रभावित परियोजनाएं देखी जा रही हैं। इनमें कई ऐसे हाउसिंग प्रोजेक्ट शामिल हैं, जहां निवेशकों ने वर्षों पहले फ्लैट और प्लॉट बुक किए थे, लेकिन अब तक उन्हें कब्जा नहीं मिल सका है। लंबे समय से अधूरी पड़ी परियोजनाओं ने खरीदारों की चिंता को और बढ़ा दिया है।
जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष
रिपोर्ट के अनुसार, जीरकपुर के कुछ प्रमुख बिल्डरों की परियोजनाएं भी विवादों में हैं। कुछ मामलों में बिल्डरों के खिलाफ पहले से कार्रवाई चल रही है, जबकि कई परियोजनाओं की वित्तीय और प्रशासनिक जांच जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक इन परियोजनाओं में निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी परियोजना में निवेश करने से पहले उसके सभी कानूनी दस्तावेज, मंजूरी और कब्जा देने की स्थिति की पूरी जांच करनी चाहिए। ऐसे प्रोजेक्ट को प्राथमिकता देनी चाहिए जहां भुगतान के साथ समय पर कब्जा मिलने की स्पष्ट व्यवस्था हो।
हाल ही में खरड़ के एक बिल्डर पर आयकर विभाग की कार्रवाई के बाद उसी समूह ने नया लग्जरी हाउसिंग प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। हालांकि, इस परियोजना के CLU की भी जांच होने की संभावना है। ऐसे में बाजार विशेषज्ञ खरीदारों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं।
बाजार पर प्रभाव
मोहाली और आसपास के क्षेत्रों में चल रही जांच का असर पूरे प्रॉपर्टी बाजार पर दिखाई देने लगा है। प्रॉपर्टी कारोबार की गति धीमी पड़ने लगी है और इसका प्रभाव चंडीगढ़ तक देखने को मिला है। हाल की एक नीलामी में रिहायशी प्लॉट अपेक्षित कीमत से कम में बिके। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती और परियोजनाओं की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक निवेशकों का भरोसा पूरी तरह लौटना मुश्किल हो सकता है।
