यास्तिका भाटिया ने लॉर्ड्स में शतक लगाकर बनाया नया इतिहास
यास्तिका भाटिया का ऐतिहासिक शतक
लंदन: इंग्लैंड महिला क्रिकेट टीम के खिलाफ चल रहे एकमात्र टेस्ट मैच में यास्तिका भाटिया ने रविवार को लॉर्ड्स के मैदान पर शतक बनाकर इतिहास रच दिया। एक साल तक चोट के कारण टीम से बाहर रहने वाली यास्तिका ने इसे अपने सपने का सच होने जैसा बताया।
जब उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ इस ऐतिहासिक टेस्ट में शतक पूरा किया, तो उन्हें अपनी वापसी की यात्रा की यादें ताजा हो गईं। यास्तिका की 113 रनों की शानदार पारी ने न केवल लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर उनका नाम दर्ज कराया, बल्कि उन्हें इस प्रतिष्ठित मैदान पर टेस्ट शतक लगाने वाली पहली महिला क्रिकेटर भी बना दिया।
चोट के कारण लंबे समय तक खेल से दूर रहने के दौरान, यास्तिका को घरेलू वनडे वर्ल्ड कप और महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) जैसे महत्वपूर्ण टूर्नामेंट से भी बाहर रहना पड़ा। बाएं हाथ की इस बल्लेबाज ने स्वीकार किया कि कई बार ऐसा लगा कि यह उपलब्धि हासिल करना असंभव है।
बीसीसीआई द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में यास्तिका ने कहा, "यह बहुत कठिन था। उस एक साल में मैं किसी भी बड़े टूर्नामेंट में नहीं खेल पाई। विश्व कप में खेलने का सपना हर किसी का होता है, लेकिन मैं चोटिल हो गई। इसके बाद मैं डब्ल्यूपीएल में भी नहीं खेल पाई। वह समय बहुत चुनौतीपूर्ण था। हालांकि, मेरे परिवार और टीम का समर्थन मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण था।"
उन्होंने आगे कहा, "मैं उन सभी का आभार व्यक्त करती हूं जिन्होंने मुझे इस स्थिति से बाहर निकलने में मदद की। अगर कोई मुझसे छह महीने पहले पूछता कि क्या मेरा नाम लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर होगा, तो मुझे खुद पर विश्वास नहीं होता। यह सच में सपने जैसा लगता है।"
यास्तिका ने बताया कि यह यादगार पारी उनके लिए व्यक्तिगत वापसी का प्रतीक थी और देश के लिए गर्व का पल भी। शतक पूरा करने के बाद, उन्होंने जश्न मनाने का कोई बड़ा तरीका नहीं अपनाया, बल्कि भावनाओं में बहकर साधारण तरीके से जश्न मनाया।
"मैंने जश्न मनाने का प्लान बनाया था, लेकिन फिर सोचा कि इसे सामान्य ही रखते हैं। हालांकि, मैंने झंडे को चूमा; यह मेरे लिए गर्व का पल था। मैं भारत के लिए बहुत कुछ करना चाहती हूं और वर्ल्ड कप भी जीतना चाहती हूं।"
भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज ने कहा, "यह मेरे लिए बहुत खास था कि मैंने अपना पहला टेस्ट शतक बनाया और वह भी लॉर्ड्स में। जब मैंने अपना हेलमेट उतारा, तो मैं थोड़ी भावुक हो गई। मुझे अपने परिवार के चेहरे याद आ रहे थे और पिछले एक साल की कठिनाइयां मेरी आंखों के सामने घूम रही थीं। कुल मिलाकर, यह एक शानदार पल था।"
