राजस्थान के किसान ने भगवान को दान की 10 करोड़ की संपत्ति
चित्तौड़गढ़ में अनोखा दान
चित्तौड़गढ़: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित प्रसिद्ध श्री सांवलिया सेठ मंदिर में एक अद्वितीय उदाहरण देखने को मिला है। डूंगरपुर जिले के किसान अमरजी गौतम पाटीदार ने अपनी सम्पत्ति, जिसकी कीमत लगभग 10 करोड़ रुपये है, भगवान सांवलिया सेठ को दान कर दी। यह संकल्प उन्होंने वर्ष 2016 में लिया था, जो अब जाकर पूरा हुआ है।
संकल्प की यात्रा
इस प्रक्रिया के दौरान, अमरजी ने प्रशासनिक और कानूनी कार्यों को पूरा करने के लिए 100 से अधिक बार चित्तौड़गढ़ और सांवलियाजी का दौरा किया। अब उनकी इच्छा है कि दान की गई भूमि पर एक भव्य गोशाला का निर्माण किया जाए। अमरजी, जो आसपुर तहसील के खेड़ा सामोर गांव के निवासी हैं, एक साधारण किसान हैं।
संकल्प कब लिया गया?
अमरजी के माता-पिता का निधन हो चुका है और वे अकेले रहते हैं। उन्होंने 2016 में अपनी सम्पूर्ण भूमि और मकान भगवान सांवलिया सेठ को समर्पित करने का संकल्प लिया था। हालांकि, भूमि पर ऋण और लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण उनका संकल्प पूरा नहीं हो सका।
दान की राशि
कई प्रयासों के बाद, मंदिर प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से उनकी 10.15 बीघा भूमि भगवान सांवलिया सेठ के नाम पर रजिस्टर्ड कर दी गई। इस संपत्ति की अनुमानित कीमत लगभग 10 करोड़ रुपये है। वर्षों की मेहनत और इंतजार के बाद उनका संकल्प पूरा हुआ।
सहयोगियों की भूमिका
दान की प्रक्रिया को सफल बनाने में कई लोगों ने मदद की। जमीन का कर्ज चुकाने और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने में पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी गिरिजा मैडम, भरत रावल, केवलजी और कुवैत में रहने वाले देवीलाल ने आर्थिक सहायता की। अधिवक्ता वालजी पाटीदार ने बिना किसी शुल्क के रजिस्ट्री की कानूनी प्रक्रिया को पूरा किया।
अमरजी पाटीदार का दृष्टिकोण
अमरजी पाटीदार ने कहा कि उनके खेत में लगे लगभग 30 आम के पेड़ों के फल भी वे कभी नहीं बेचते। उनकी इच्छा है कि दान की गई भूमि पर भविष्य में एक भव्य गोशाला बनाई जाए, जिससे गौसेवा और समाज सेवा का कार्य किया जा सके। इसके अलावा, वे अपनी माता के करीब एक किलो चांदी के आभूषण भी भगवान सांवलिया सेठ को अर्पित करने की योजना बना रहे हैं।
समाज में अमरजी की पहचान
श्री सांवलिया मंदिर मंडल के प्रशासनिक अधिकारी राजेंद्र सिंह ने अमरजी पाटीदार के इस दान को आस्था, त्याग और समर्पण की अनूठी मिसाल बताया। उनकी कहानी पूरे राजस्थान में चर्चा का विषय बन गई है और कई लोग उन्हें श्रद्धा और निस्वार्थ भावना के कारण कलयुग का सुदामा कहकर संबोधित कर रहे हैं।
