राजस्थान में समान नागरिक संहिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
राजस्थान सरकार की नई पहल
राजस्थान सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके तहत, सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है, जो प्रस्तावित कानून का प्रारूप तैयार करेगी।
सामाजिक समरसता को बढ़ावा
सरकार का मानना है कि यह कदम सामाजिक समरसता, समान अधिकार और न्यायपूर्ण व्यवस्था को मजबूत करने में सहायक होगा। इस संबंध में जानकारी देते हुए राजस्थान के कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने सचिवालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में समिति के गठन की घोषणा की।
विशेषज्ञ समिति का गठन
जोगाराम पटेल ने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल ने अप्रैल 2026 में यूसीसी के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने का निर्णय लिया था। इस समिति में न्यायिक, विधिक और प्रशासनिक क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञ शामिल हैं, जो विभिन्न राज्यों के अनुभवों और कानूनों का अध्ययन कर राजस्थान की सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप एक मॉडल तैयार करेंगे। उन्होंने कहा कि समिति की रिपोर्ट मिलने पर सरकार उसे कैबिनेट के समक्ष पेश करेगी और मंजूरी मिलने के बाद विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा।
विवाह और तलाक के नियमों में बदलाव
यूसीसी के लागू होने पर विवाह, तलाक, गोद लेने, उत्तराधिकार और भरण-पोषण जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू होगा। वर्तमान में विभिन्न धर्मों के लोग अपने-अपने पर्सनल लॉ का पालन करते हैं। नए कानून के तहत विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य होगा।
लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को भी अपना पंजीकरण कराना होगा। यूसीसी का एक मुख्य उद्देश्य महिलाओं और पुरुषों के बीच कानूनी समानता सुनिश्चित करना है। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के समान अधिकार मिलेंगे, जिससे महिलाओं के साथ होने वाले कानूनी भेदभाव को समाप्त करने में मदद मिलेगी।
महिलाओं के अधिकारों को मजबूती
गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा कि वर्तमान में विभिन्न धर्मों के अलग-अलग कानूनों के कारण महिलाओं को समान अधिकार नहीं मिल पाते। यूसीसी लागू होने से सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी ढांचा बनेगा और महिलाओं के अधिकारों को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि इस कानून के लागू होने से राजस्थान को नई दिशा और पहचान मिलेगी, जिससे समाज में समानता और न्याय की भावना को बढ़ावा मिलेगा। सरकार ने संकेत दिए हैं कि स्थानीय जनजातीय समुदायों को उनकी सांस्कृतिक परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जा सकता है। इस विषय पर अंतिम निर्णय समिति की सिफारिशों और विधेयक के प्रारूप के आधार पर लिया जाएगा।
