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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस की कार्रवाई तेज

अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावे की चोरी के मामले में पुलिस ने आठ आरोपियों के घरों पर छापेमारी की। इस दौरान उनके परिवारों से पूछताछ की गई और स्थानीय लोगों को भी बयान देने का मौका दिया गया। जांच में अब तक 79 लाख रुपये की बरामदगी हो चुकी है। चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है, जबकि विपक्ष आरोप लगा रहा है कि बड़े लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
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पुलिस ने आरोपियों के घरों पर की छापेमारी

अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावे की चोरी के मामले में पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। रविवार को पुलिस ने एक साथ आठ आरोपियों के घरों पर छापेमारी की। इस दौरान उनके परिवार के सदस्यों से पूछताछ की गई और पड़ोसियों से भी जानकारी इकट्ठा की गई। बताया जा रहा है कि पुलिस ने सभी आरोपियों के परिजनों के बयान दर्ज किए हैं। इसके साथ ही, इस मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच भी जारी है। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर अनुकल्प मिश्रा, अवनीश शुक्ला, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।


स्थानीय लोगों को भी दिया गया बयान देने का मौका

जांच के दौरान स्थानीय निवासियों को भी अपने बयान और साक्ष्य पुलिस के सामने प्रस्तुत करने का अवसर दिया जा रहा है। कार्रवाई के समय आरोपियों के घरों के बाहर पुलिस बल तैनात रहा, ताकि जांच में कोई रुकावट न आए और अनधिकृत व्यक्तियों का प्रवेश रोका जा सके।


अविनाश शुक्ला के घर पर भी की गई कार्रवाई

इसी क्रम में कौशलपुरी फेस-एक में आरोपी अविनाश शुक्ला के किराए के मकान पर भी पुलिस ने कार्रवाई की। जांच के दौरान मकान के प्रवेश मार्ग पर ताला लगाकर क्षेत्र को पुलिस निगरानी में ले लिया गया। पुलिस मौके पर साक्ष्य जुटाने में जुटी है। अब तक सात आरोपियों से लगभग 79 लाख रुपये की बरामदगी हो चुकी है, जिसमें सबसे अधिक करीब 20 लाख रुपये अविनाश शुक्ला के पास से मिले हैं। पुलिस सभी आरोपियों के आवासों पर साक्ष्य इकट्ठा करने और मामले की गहन जांच कर रही है।


चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा

चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा
राम मंदिर चढ़ावे की चोरी के मामले में लगातार उठ रहे सवालों के बीच चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, प्राथमिकी में इनका नाम शामिल नहीं है। विपक्ष का आरोप है कि बड़े लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है।