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रावी नदी के बदलते प्रवाह से पंजाब की सीमा पर सुरक्षा चुनौतियाँ

पंजाब की सीमा पर रावी नदी के बदलते प्रवाह ने सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौतियाँ पेश की हैं। पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू ने केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर सुरक्षा उपायों को लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने बाड़बंदी, ड्रोन तस्करी रोकने के उपाय, और सीमावर्ती गांवों के लिए स्थायी पुल की मांग की है। जानें इस मुद्दे पर उनके सुझाव और रणनीतियाँ।
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रावी नदी सीमा पर सुरक्षा का संकट


रावी नदी सीमा पर खतरा: पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों में एक नई समस्या उभरकर सामने आई है, जिसने सुरक्षा बलों की चिंता को बढ़ा दिया है। दरअसल, रावी नदी का प्रवाह लगातार बदल रहा है, जिससे सीमा पर बाड़बंदी और निगरानी प्रणाली प्रभावित हो रही है। इस विषय पर पंजाब के पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखा है।


केंद्र सरकार की नीति पर सुझाव

सिद्धू ने पत्र में केंद्र सरकार की प्रहार राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी नीति को सीमा के अंतिम छोर तक लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि केंद्र ने आतंकवाद से निपटने के लिए एक व्यापक योजना बनाई है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ तभी होगा जब इसे सही तरीके से जमीनी स्तर पर लागू किया जाए। बटाला और अमृतसर में प्रशासनिक अनुभव रखने वाले सिद्धू ने अपने सुझावों को प्रहार नीति के सात स्तंभों से जोड़ा है।


नदी के प्रवाह में बदलाव से बाड़बंदी में कठिनाई

सिद्धू ने बताया कि रावी नदी हर मानसून में अपना रास्ता बदलती है, जिससे स्थायी बाड़ लगाना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने ब्रह्मपुत्र नदी में लागू एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली को रावी और सतलुज के क्षेत्रों में भी लागू करने का सुझाव दिया। इसके साथ ही, बीएसएफ और पंजाब सिंचाई विभाग को मिलकर बाढ़-रोधी बाड़ का डिज़ाइन तैयार करने की सलाह दी गई है, क्योंकि 2025 में आई बाढ़ में गुरदासपुर की सीमा चौकियां क्षतिग्रस्त हो गई थीं।


ड्रोन से तस्करी रोकने के उपाय

सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से हो रही नशे की तस्करी को लेकर सिद्धू ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने एक बहुस्तरीय काउंटर-ड्रोन प्रणाली विकसित करने और एआई तकनीक का उपयोग करके संभावित ड्रॉप जोन की पहचान करने का सुझाव दिया। इसके अलावा, जिला पुलिस की सूचनाओं को राष्ट्रीय खुफिया तंत्र से जोड़ने, सीमा जिलों में विशेष अदालतें और फोरेंसिक लैब स्थापित करने की भी मांग की गई है।


सीमावर्ती गांवों के लिए स्थायी पुल की आवश्यकता

पत्र में सीमा क्षेत्र के गांवों की दैनिक समस्याओं का भी उल्लेख किया गया है। सिद्धू ने गुरदासपुर के मकौड़ा पत्तन पर स्थायी पुल बनाने की मांग की है, क्योंकि रावी पार बसे गांवों के लोग मौसमी पोंटून पुल पर निर्भर हैं। उन्होंने बाड़ पार खेती करने वाले किसानों के लिए बेहतर गेट टाइमिंग और उचित मुआवजे की व्यवस्था करने की सिफारिश की है।


सीमा गांवों में भर्ती और प्रशिक्षण पर ध्यान

सिद्धू ने सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात शिक्षकों, डॉक्टरों और राजस्व कर्मचारियों के लिए कठिन क्षेत्र प्रोत्साहन देने और सीमा गांवों से अधिक होम गार्ड भर्ती करने की मांग की है। उन्होंने उपायुक्त और एसडीएम स्तर के अधिकारियों को प्रहार रणनीति की ट्रेनिंग देने का सुझाव दिया। इसके साथ ही, हर गिराए गए ड्रोन का पूरा रिकॉर्ड रखने और करतारपुर गलियारे को मानवीय जुड़ाव का माध्यम बनाए रखने की बात भी कही।