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रूस का नया फाइटर जेट एसयू 75 चेकमेट: क्या है इसकी खासियतें?

रूस ने अपने नए फाइटर जेट एसयू 75 चेकमेट का पहला उड़ान प्रोटोटाइप विकसित करने की घोषणा की है। यह विमान अमेरिका के F35 और चीन के J20 को चुनौती देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। जानें इस विमान की विशेषताएँ, इसकी तकनीकी क्षमताएँ और भारत के लिए इसका क्या महत्व है। क्या यह विमान समय पर उड़ान भर सकेगा? जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख।
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रूस का नया फाइटर जेट एसयू 75 चेकमेट: क्या है इसकी खासियतें?

रूस का नया कदम हथियारों के बाजार में

वर्तमान में वैश्विक हथियारों के बाजार में हलचल मची हुई है। रूस, जो पहले से ही यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (यूएसी) के सीईओ वादिम बड़े खान ने पुष्टि की है कि रूस के नए स्टील फाइटर जेट एसयू 75 चेकमेट का पहला उड़ान प्रोटोटाइप तैयार किया जा रहा है। यह विमान केवल एक साधारण विमान नहीं है, बल्कि यह पुतिन का एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसे अमेरिका के F35 और चीन के J20 के मुकाबले के लिए विकसित किया गया है। लेकिन क्या यह विमान समय पर उड़ान भर सकेगा और भारत के लिए इसका क्या महत्व है?


चेकमेट का अनावरण और विकास

जुलाई 2021 में मॉस्को एयर शो में जब रूस ने एक ढके हुए विमान से पर्दा उठाया, तो सभी हैरान रह गए। यह एक सिंगल इंजन वाला अत्याधुनिक फाइटर जेट था, जिसे चेकमेट नाम दिया गया। रूस के पास पहले से ही एसयू 57 जैसे भारी और दोहरे इंजन वाले विमानों का संग्रह है, लेकिन एसयू 75 को लाइट टैक्टिकल एयरक्राफ्ट के रूप में पेश किया गया। हालांकि, इस प्रोजेक्ट को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसकी पहली उड़ान 2023 में निर्धारित थी, लेकिन अब इसकी उड़ान 2027 तक होने की उम्मीद है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, 2021 में दिखाए गए मॉडल से असली प्रोटोटाइप में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।


एसयू 75 की विशेषताएँ

एसयू 75 की एक प्रमुख विशेषता इसका ओपन आर्किटेक्चर है, जो खरीदार देशों को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार इसमें बदलाव करने की अनुमति देता है। इसमें एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पायलट असिस्टेंट सिस्टम शामिल है, जो युद्ध के दौरान पायलट के तनाव को कम करता है। रूस अब SU 57 और SU 75 के संयोजन के साथ एक नई रणनीति बना रहा है। यह नया विमान एसयू 57 का एक छोटा लेकिन तेज़ संस्करण है, जो विभिन्न प्रकार की मिसाइलों को अपने अंदरूनी वेपन बे में ले जा सकता है, जिससे इसकी पहचान रडार पर करना लगभग असंभव हो जाता है।