रेल नीर की असली कीमत: जानें ट्रेन में बिकने वाली बोतल की कहानी
रेल नीर की यात्रा: एक बोतल की कहानी
नई दिल्ली: यदि आपने भारतीय रेलवे में यात्रा की है, तो आपने निश्चित रूप से 'रेल नीर' की बोतल का सेवन किया होगा। ट्रेन की सीट पर बैठकर अपनी प्यास बुझाने के लिए आप खुशी-खुशी 14 रुपये चुकाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसकी असली लागत क्या है? यह पानी की बोतल किन-किन प्रक्रियाओं से होकर आपकी सीट तक पहुंचती है, जानकर आप चकित रह जाएंगे।
रेल नीर की बोतलिंग प्रक्रिया
रेलवे यात्रियों के लिए इस विशेष पानी की बोतलिंग देश के विभिन्न स्थानों पर स्थित प्लांट में की जाती है। आईआरसीटीसी ने क्षेत्र की मांग के अनुसार कई प्लांट स्थापित किए हैं, जिनमें दिल्ली का नांगलोई, उत्तर प्रदेश के अमेठी और हापुड़, बिहार का दानापुर, मध्य प्रदेश का मंडीदीप, और महाराष्ट्र का नागपुर और अंबरनाथ शामिल हैं। इन प्लांट्स में पानी को शुद्ध करने के बाद बोतलों में भरकर विभिन्न रेलवे स्टेशनों और ट्रेन वेंडर्स तक पहुंचाया जाता है।
वेंडर को बोतल की लागत
रेल नीर के होलसेल रेट की कहानी भी दिलचस्प है। पहले, रेल नीर पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता था और यह बोतल ग्राहकों को 15 रुपये में मिलती थी। लेकिन जब सरकार ने इसे 5 प्रतिशत वाले टैक्स स्लैब में डाला, तो कीमत 15 रुपये से घटकर 14 रुपये हो गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एक लीटर रेल नीर की बोतल बनाने में असली खर्च केवल 9.22 रुपये आता है। इसके बाद इसमें ट्रांसपोर्टेशन का खर्च जुड़ता है। यदि वेंडर और प्लांट के बीच की दूरी 75 किलोमीटर से कम है, तो वेंडर को यह लगभग 10 रुपये की पड़ती है, और यदि दूरी अधिक है, तो यह खर्च लगभग 10.50 रुपये तक पहुंच जाता है।
वेंडर और रेलवे की कमाई
जब बोतल की कीमत 15 रुपये थी, तब आईआरसीटीसी वेंडर्स को एक बोतल 10.32 रुपये में बेचती थी, जिससे वेंडर को एक बोतल पर लगभग 4 रुपये का मुनाफा होता था। जीएसटी रेट कम होने के बाद लागत में थोड़ा बदलाव आया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि आज भी 14 रुपये की बोतल बेचकर वेंडर लगभग 4 रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। वहीं, आईआरसीटीसी की बात करें, तो रेलवे को रेल नीर से 11.93 प्रतिशत की कमाई होती है और वह हर बोतल पर लगभग 1.10 रुपये की बचत करती है।
