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लखनऊ विश्वविद्यालय के शिक्षक के प्रमोशन पर विवाद, शिकायत में गंभीर आरोप

लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के शिक्षक डॉ. रविकांत के प्रमोशन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमों की जानकारी छिपाई गई। कुलपति को भेजे गए पत्र में प्रमोशन को रद्द करने की मांग की गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। क्या यह मामला गंभीर है? जानें पूरी कहानी।
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लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रमोशन विवाद

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के शिक्षक डॉ. रविकांत के प्रमोशन को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। इस संदर्भ में कुलपति को एक एफिडेविट के साथ शिकायत पत्र भेजकर प्रमोशन को तुरंत रद्द करने की मांग की गई है। शिकायत में यह आरोप लगाया गया है कि डॉ. रविकांत के प्रमोशन के समय उनके खिलाफ चल रहे मुकदमों की जानकारी छिपाई गई। विश्वविद्यालय ने 8 जून 2026 को उनके प्रमोशन का पत्र जारी किया था।


आपराधिक मुकदमों का उल्लेख

शिकायतकर्ता कार्तिक पांडेय ने कहा है कि डॉ. रविकांत के खिलाफ हसनगंज थाने में FIR संख्या 110/2022 के तहत IPC की धारा 153A, 504, 505(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 के तहत मामला दर्ज है। यह मामला न्यायालय में लंबित है।


इसके अतिरिक्त, एक और मामले का उल्लेख किया गया है जिसमें बताया गया है कि डॉ. रविकांत के खिलाफ हाईकोर्ट, लखनऊ में याचिका संख्या 1510/2025 दायर की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन मामलों की जानकारी होने के बावजूद उन्हें प्रमोशन दिया गया।


विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका पर सवाल

शिकायत में कुलसचिव की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि विश्वविद्यालय अधिनियम में कुलसचिव की जिम्मेदारियों के बावजूद प्रमोशन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। हालांकि, लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रवक्ता प्रो. मुकुल श्रीवास्तव का कहना है कि डॉ. रविकांत के खिलाफ विश्वविद्यालय स्तर पर कोई विभागीय मामला लंबित नहीं है।