लॉकहीड मार्टिन का भारत में उत्पादन विस्तार, 60 मध्यम परिवहन विमानों का ठेका
भारत में उत्पादन क्षमता का विस्तार
(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, 4 अक्टूबर: अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने घोषणा की है कि वह भारतीय सशस्त्र बलों के लिए मध्यम आकार के परिवहन विमानों की आपूर्ति के ठेके के बाद भारत में अपनी उत्पादन क्षमताओं को और बढ़ाएगी। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी साझा की। भारत ने अगस्त में 10.5 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत से 60 मध्यम परिवहन विमानों की खरीद के लिए निविदा जारी की थी।
भारतीय कंपनियों की भागीदारी
इस ठेके के लिए प्रतिस्पर्धा में पांच भारतीय कंपनियां शामिल हैं: टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (टीएएसएल), महिंद्रा समूह, अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और रिलायंस डिफेंस। इन कंपनियों से वैश्विक विमान निर्माताओं को इस कार्यक्रम में शामिल करने की उम्मीद है। लॉकहीड मार्टिन के वैश्विक कारोबार विकास एवं रणनीति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डैन टेनी ने कहा, 'टाटा के साथ हमारी लंबे समय से साझेदारी है।'
उत्पादन और साझेदारी
टेनी ने बताया कि टाटा सी-130जे विमानों के कलपुर्जों और पिछले हिस्से का निर्माण करती है, जो एक मजबूत क्षमता है और इसे मौजूदा बोली के तहत बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा, 'हम भारत में उत्पादन और अन्य गतिविधियों के माध्यम से इस क्षमता का विस्तार करना चाहते हैं।' टीएएसएल ने इस ठेके के लिए लॉकहीड मार्टिन के साथ साझेदारी की है, जबकि महिंद्रा ने ब्राजील की एम्ब्रेयर के साथ सहयोग किया है।
उन्नत क्षमताओं का विकास
टेनी ने कहा, 'भारत हमारे लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार रहा है जो इस विमान और उससे आगे की उन्नत क्षमताओं को विकसित करने में मदद करेगा।' यदि लॉकहीड मार्टिन और टीएएसएल इस बोली में सफल होते हैं, तो उत्पादन नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। कंपनी ने बताया कि उसके प्रस्ताव में 12 विमान सीधे उड़ान भरने की स्थिति में तैयार करने और 48 विमानों का निर्माण भारत में करने की योजना शामिल है।
भारतीय वायुसेना की क्षमताएं
लॉकहीड मार्टिन ने भारतीय वायुसेना के मौजूदा 12 सी-130जे विमानों को भी आधुनिक मानकों के अनुसार उन्नत करने का प्रस्ताव दिया है। इससे भारतीय वायुसेना के पास कुल 72 ऐसे विमान होंगे, जो समान आधुनिक तकनीक से लैस होंगे। मौजूदा सी-130जे विमानों ने 58,000 से अधिक उड़ान घंटे पूरे कर लिए हैं और इनका उपयोग लद्दाख में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अभियान, नेपाल में बाढ़ के दौरान मानवीय सहायता मिशन और 2023 में सूडान से भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए किया गया था।
