शरद पूर्णिमा 2026: चंद्रमा की अद्भुत रात और उसकी धार्मिक महत्ता
शरद पूर्णिमा का महत्व
शरद पूर्णिमा 2026: इस विशेष रात को चंद्रमा को देखना हर किसी की ख्वाहिश होती है। इसकी अद्भुत सुंदरता और धार्मिक तथा वैज्ञानिक महत्व के कारण यह रात सभी को आकर्षित करती है। हिंदू परंपराओं और लोककथाओं के अनुसार, इस चंद्रमा को देखने की इच्छा सभी में होती है।
इस रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं के साथ पूर्ण होता है। मान्यता है कि इसकी किरणों से अमृत की वर्षा होती है, जो मन को शांति और सकारात्मकता प्रदान करती है। इसलिए भक्तजन इसके दर्शन के लिए उत्सुक रहते हैं।
चंद्रोदय का समय
उत्तर भारत में चंद्रोदय का समय:
दिल्ली / नोएडा: शाम 05:00 बजे
लखनऊ: शाम 04:47 बजे
कानपुर: शाम 04:50 बजे
प्रयागराज: शाम 04:45 बजे
वाराणसी: शाम 04:40 बजे
जयपुर: शाम 05:08 बजे
चंडीगढ़: शाम 04:59 बजे
खीर रखने की परंपरा
शरद पूर्णिमा की रात को खुले आसमान के नीचे खीर रखने की परंपरा है, ताकि उस पर चंद्रमा की अमृत रूपी किरणें पड़ सकें। इस दिव्य प्रसाद को पाने के लिए सभी इस रात चंद्रमा का दीदार करना चाहते हैं।
रात्रि की पूजा और अर्घ्य
रात्रि की पूजा: चंद्रोदय के बाद तांबे या लोटे में जल, अक्षत और फूल लेकर चंद्र देव को अर्घ्य दें। मां लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाकर 'कोजागरी व्रत' की कथा सुनें और आरती करें।
प्रसाद ग्रहण करने का समय
प्रसाद ग्रहण: अगली सुबह (26 अक्टूबर) सूर्योदय से पहले या स्नान के बाद इस अमृत रूपी खीर को भगवान को भोग लगाकर परिवार के साथ ग्रहण करें। दूध से बनी चीजों को पूरी रात बाहर छोड़ना फूड सेफ्टी के लिहाज से ठीक नहीं होता, इसलिए आधी रात के बाद इसे अंदर रखना बेहतर है।
