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शिक्षा मंत्री ने NCERT अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NCERT अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया है। यह कदम उस समय उठाया गया जब अधिकारियों ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक कागज सप्लाई करने वाली कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने के फैसले का उचित बचाव नहीं किया। इस मामले में बाफना ग्लोबल वेंचर प्राइवेट लिमिटेड का नाम शामिल है, जिसने अदालत में अपनी सफाई में अंतरराष्ट्रीय स्थिति का हवाला दिया। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और आगामी सुनवाई की तारीख।
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री का सख्त रुख

नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए एक गंभीर कार्रवाई की है। सूत्रों के अनुसार, मंत्री ने उन अधिकारियों की गहन जांच का आदेश दिया है जो दिल्ली उच्च न्यायालय में एक कागज सप्लाई करने वाली कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने के निर्णय का उचित बचाव नहीं कर सके। इस अदालती प्रक्रिया में लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि जिम्मेदारी तय की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।


बाफना ग्लोबल वेंचर का विवाद

बाफना ग्लोबल वेंचर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा यह विवाद तब शुरू हुआ जब NCERT ने 22 जून को इस कंपनी को अगले दो वर्षों के लिए अपनी खरीद प्रक्रिया में भाग लेने से रोकने का आदेश जारी किया। कंपनी ने इस ब्लैकलिस्टिंग के फैसले को चुनौती देते हुए 24 जून को दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। चौंकाने वाली बात यह रही कि सुनवाई के दौरान NCERT का कोई प्रतिनिधि अदालत में उपस्थित नहीं था, जिससे कंपनी को लाभ मिला और हाई कोर्ट ने कंपनी के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाते हुए अंतरिम राहत प्रदान की। इसके अलावा, अदालत ने NCERT को कंपनी की 6 करोड़ रुपये से अधिक की बैंक गारंटी का उपयोग करने से भी रोक दिया है।


टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल

हाई कोर्ट में मामले की सही पैरवी न होने की खबरों पर शिक्षा मंत्रालय ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। मंत्रालय ने NCERT से इस पूरे मामले की जांच करने को कहा है, जिसमें यह देखना है कि बाफना ग्लोबल वेंचर प्राइवेट लिमिटेड को निर्धारित मानक और योग्यता पूरी नहीं करने के बावजूद टेंडर कैसे मिला। इसके साथ ही, मंत्रालय ने यह भी पूछा है कि कंपनी ने तय समय सीमा के भीतर कागज की सप्लाई क्यों नहीं की और NCERT ने हाई कोर्ट में इस मामले को मजबूती से क्यों नहीं रखा। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि पाठ्यपुस्तकों की खरीद और उत्पादन में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए और किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या कानूनी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


अगली सुनवाई की तारीख

अदालत में सुनवाई के दौरान बाफना ग्लोबल वेंचर ने अपनी सफाई में अंतरराष्ट्रीय स्थिति का हवाला दिया। कंपनी का कहना था कि ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण कागज बनाने में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण रसायन 'हाइड्रोजन पेरोक्साइड' की बाजार में भारी कमी हो गई थी, जिससे किताबों के लिए कागज की सप्लाई में देरी हुई। इस विवाद की अगली सुनवाई 20 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट में होने वाली है।