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शिमला-किन्नौर हाईवे पर लैंडस्लाइड: सैकड़ों वाहन फंसे, मानसून की स्थिति में बदलाव

हिमाचल प्रदेश में शिमला-किन्नौर हाईवे पर हाल ही में हुए लैंडस्लाइड ने सैकड़ों वाहनों को फंसा दिया है। मानसून की गतिविधियाँ अब कम हो रही हैं, लेकिन बारिश के कारण समस्याएँ अभी भी बनी हुई हैं। जानें इस लैंडस्लाइड के कारण क्या नुकसान हुआ है और मौसम की स्थिति में क्या बदलाव आ रहा है।
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शिमला-किन्नौर हाईवे पर लैंडस्लाइड


शिमला-किन्नौर हाईवे पर लैंडस्लाइड: हिमाचल प्रदेश में मानसून की गतिविधियाँ अब धीरे-धीरे कम हो रही हैं, लेकिन बारिश के कारण समस्याएँ अभी भी बनी हुई हैं। मंगलवार सुबह शिमला-किन्नौर नेशनल हाईवे-5 पर ठियोग के जनोगघाट के पास एक बड़ा लैंडस्लाइड हुआ। इसके साथ ही, देवदार के कुछ बड़े पेड़ भी सड़क पर गिर गए, जिससे हाईवे पूरी तरह से बंद हो गया और दोनों दिशाओं में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सेब से भरे ट्रकों को इस स्थिति में सबसे अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ा है।


सुबह 5 बजे लैंडस्लाइड की घटना

सूत्रों के अनुसार, मंगलवार सुबह लगभग 5 बजे जनोगघाट के पास अचानक मलबा सड़क पर गिर गया। इसी समय, देवदार के बड़े पेड़ भी गिर गए। इसके परिणामस्वरूप, दोनों दिशाओं में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। शिमला-किन्नौर NH-5, किन्नौर और ऊपरी शिमला को अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण मार्ग है। सेब के मौसम के दौरान, इस सड़क पर ट्रकों और अन्य मालवाहक वाहनों की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे में सड़क बंद होने से किसानों और बागवानों को भी समस्याएँ हो सकती हैं।


मानसून की स्थिति

हिमाचल प्रदेश में मानसून की सक्रियता अब कम हो रही है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक शोभित कटियार के अनुसार, प्रदेश से मानसून की विदाई में अभी दो से तीन सप्ताह लग सकते हैं। सामान्यतः, हिमाचल में मानसून की विदाई की तारीख 25 सितंबर मानी जाती है। उन्होंने बताया कि अगले कुछ दिनों में बारिश की गतिविधियाँ कम रहने की संभावना है, जिससे राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ रहने और दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने का अनुमान है। हालांकि, 12 सितंबर के आसपास बारिश की गतिविधियों में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है।


8 सितंबर को भारी बारिश का अलर्ट

भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 8 सितंबर को हिमाचल प्रदेश के लिए कोई भारी बारिश की चेतावनी नहीं है। 9, 10 और 11 सितंबर के लिए भी कोई विशेष अलर्ट नहीं दिया गया है। हालांकि, पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम अचानक बदल सकता है, विशेषकर उन स्थानों पर जहाँ पहले से भूस्खलन का खतरा है।


मानसून में बारिश की कमी

इस मानसून सीजन में हिमाचल प्रदेश में सामान्य से लगभग 9 प्रतिशत कम बारिश हुई है। 1 जून से 7 सितंबर के बीच, सामान्य बारिश लगभग 648 मिलीमीटर होती है, जबकि इस बार केवल 588 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। हालांकि, सभी जिलों में बारिश की स्थिति समान नहीं रही।


मानसून से नुकसान

इस मानसून सीजन में बारिश, बाढ़, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक घटनाओं से हिमाचल को भारी नुकसान हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में अब तक लगभग 1,423 करोड़ रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। सबसे अधिक नुकसान लोक निर्माण विभाग को हुआ है।


मानसून से हुई मौतें

इस मानसून सीजन में हिमाचल प्रदेश में बारिश और अन्य घटनाओं से जुड़ी दुर्घटनाओं में अब तक 283 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से अधिकांश मौतें सड़क हादसों में हुई हैं। प्रशासन और लोगों को उम्मीद है कि मानसून कमजोर होने के साथ आपदा की घटनाओं में कमी आएगी।