संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी: ऑनलाइन ठगी के लिए पढ़े-लिखे लोगों की तस्करी बढ़ रही है
आप्रवासन एजेंसी की नई रिपोर्ट
जिनेवा, 28 जुलाई (एपी) - संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी ने हाल ही में चेतावनी दी है कि आपराधिक नेटवर्क पढ़े-लिखे और अंग्रेजी बोलने वाले व्यक्तियों की तस्करी कर रहे हैं, जो ऑनलाइन ठगी के केंद्रों में काम करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) के अनुसार, यह समस्या तेजी से बढ़ रही है।
आईओएम ने बताया कि अधिकांश मामलों में सोशल मीडिया का उपयोग करके लोगों को विदेश में नौकरी का झांसा देकर फंसाया जाता है। इसके बाद, उन्हें कैद कर लिया जाता है, उनके पहचान पत्र छीन लिए जाते हैं, और उन्हें हिंसा, धमकियों और कर्ज के बोझ के माध्यम से ऑनलाइन ठगी करने के लिए मजबूर किया जाता है। आईओएम की महानिदेशक एमी पोप ने पत्रकारों से कहा, 'हमारे सामने ऐसे कई मामले आ रहे हैं।'
पोप ने यह भी बताया कि 80 से अधिक देशों के लोग इस ठगी के धंधे में फंस रहे हैं। उन्होंने कहा, 'वे उन लोगों को भर्ती कर रहे हैं जो अच्छी अंग्रेजी बोलते हैं और जिनके पास स्नातक की डिग्री होती है या वे कुछ हद तक शिक्षित होते हैं।' यह समस्या विशेष रूप से एशिया में बढ़ रही है।
प्रवासन एजेंसी ने संयुक्त राष्ट्र के मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले वर्ष पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में इस ठगी से होने वाला नुकसान 114 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। इस क्षेत्र में लाखों श्रमिकों को तस्करी करके लाया गया है। आईओएम ने 2022 से 2025 के बीच जबरदस्ती अपराध का शिकार हुए 3,500 से अधिक पीड़ितों की मदद की है, जो लगभग 40 देशों से संबंधित हैं। इंडोनेशिया, भारत, श्रीलंका, इथियोपिया, केन्या और बांग्लादेश के लोग इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित हैं।
