संयुक्त राष्ट्र महासभा ने पारित किया ऐतिहासिक प्रस्ताव, नया विश्व मानचित्र होगा लागू
नया विश्व मानचित्र: एक ऐतिहासिक बदलाव
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है, जो भौगोलिक व्यवस्था को बदलते हुए दुनिया के नए नक्शे को पेश करेगा। इस निर्णय के बाद, स्कूलों से लेकर सरकारी कार्यालयों तक, विश्व का मानचित्र एक नए रूप में दिखाई देगा। नए नक्शे में महाद्वीपों और देशों का आकार उनके वास्तविक क्षेत्रफल के सही अनुपात में प्रदर्शित होगा। भारत सहित 164 देशों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि अमेरिका इस पर विरोध में एकमात्र देश रहा। मतदान प्रक्रिया में 6 देश अनुपस्थित रहे।
मर्केटर मैप की जगह इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन
अब तक, 1569 में जेरार्डस मर्केटर द्वारा बनाए गए 'मर्केटर वर्ल्ड मैप' का उपयोग किया जाता रहा है। यह मानचित्र समुद्री नेविगेशन के लिए बनाया गया था, लेकिन इसे 3D धरती को 2D में दिखाने के कारण कई विसंगतियां थीं। इसमें भूमध्य रेखा से दूर के देश जैसे यूरोप, ग्रीनलैंड, कनाडा और रूस अपने वास्तविक आकार से बड़े दिखते थे, जबकि भूमध्य रेखा के करीब के देश छोटे नजर आते थे। अब 'इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन' (Equal Earth Projection) का उपयोग किया जाएगा, जो सभी देशों के क्षेत्रफल को निष्पक्षता से दर्शाएगा।
अफ्रीका का आकार बढ़ेगा, यूरोप और अमेरिका का घटेगा
नए नक्शे के लागू होने से किसी देश की वास्तविक सीमाओं या क्षेत्रफल में कोई परिवर्तन नहीं होगा, केवल उनके दृश्य आकार में बदलाव होगा। अफ्रीकी महाद्वीप अब पहले से कहीं अधिक विशाल दिखाई देगा, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका के देश छोटे नजर आएंगे। एशिया के कुछ हिस्सों का आकार भी सिकुड़ा हुआ लगेगा। अफ्रीकी संघ ने इस निर्णय का स्वागत किया है और इसे वैश्विक समानता और ऐतिहासिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
भारत पर प्रभाव
भारत के संदर्भ में, सीमाओं या क्षेत्रफल में कोई बदलाव नहीं होगा। चूंकि भारत भूमध्य रेखा के करीब है, इसलिए पुराने मर्केटर नक्शे में यह छोटा दिखाई देता था। नए 'इक्वल अर्थ' नक्शे में भारत का आकार अधिक संतुलित और बड़ा नजर आएगा, खासकर रूस, कनाडा या यूरोपीय देशों की तुलना में।
अमेरिका का विरोध
अमेरिका ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है और इसे एक वैचारिक एजेंडा बताया है। अमेरिकी प्रतिनिधि यारिना फेरेन्सेविच ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक समस्याओं जैसे युद्ध, गरीबी और जलवायु परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि 16वीं सदी के नक्शे को बदलने पर। हालांकि, भारी बहुमत के कारण प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है।
