संसद के मॉनसून सत्र में विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन
संसद का मॉनसून सत्र
संसद का मॉनसून सत्र: इस सत्र में विपक्ष ने अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावे की चोरी और दिल्ली में छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह से छात्रों पर की गई कार्रवाई पर स्पष्टीकरण की मांग की है। इस दौरान लोकसभा में अब तक कुल 11 विधेयक पारित हो चुके हैं, जिनमें से 9 विधेयक बिना किसी चर्चा के पास कर दिए गए, जबकि केवल 2 पर बहस हुई। बसपा प्रमुख मायावती ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर सत्ता के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया है।
मायावती ने एक पोस्ट में लिखा, "जैसा कि सभी जानते हैं, FCRA संशोधन विधेयक, जिसे सरकार अत्यंत महत्वपूर्ण बताकर जल्दी पास कराना चाहती थी, विपक्ष के विरोध के चलते बिना प्रारंभिक चर्चा के संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजा गया है। कांग्रेस और उनके सहयोगी दल इस विधेयक को अल्पसंख्यक विरोधी बताकर इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार इसे विदेशी फंडिंग में कथित भ्रष्टाचार से जोड़कर इसमें बदलाव करना चाहती है। यह स्पष्ट है कि इस विधेयक का राजनीतिकरण दोनों पक्षों ने किया है।"
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए मायावती ने कहा, "यदि विपक्ष इस विधेयक को संसद में रखने के दौरान इसे चलने देता, तो इसकी कमियों को उजागर किया जा सकता था। लेकिन उन्होंने संसद को अपनी जिद के अनुसार नहीं चलने दिया। इसके परिणामस्वरूप कई अन्य विधेयक भी बिना रोक-टोक के पास हो गए, जिनका विरोध होना चाहिए था। इससे यह प्रतीत होता है कि विपक्ष की अंदरूनी मिलीभगत है या फिर वे जन-जी के वोटों के स्वार्थ में अन्य मुद्दों को नजरअंदाज कर रहे हैं।"
1. जैसाकि सर्वविदित है कि FCRA संशोधन बिल, जिसे सरकार अति-महत्वपूर्ण बताकर अन्य विधेयकों की तरह ही इसे तुरन्त पास कराना चाहती थी, किन्तु विपक्ष के ज़बरदस्त विरोध के चलते व संसद में इस पर बिना प्रारम्भिक चर्चा के ही इसे कल काफी आपाधापी में संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेज दिया…
— Mayawati (@Mayawati) August 13, 2026
उन्होंने आगे कहा, "अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी का मुद्दा भी संसद में उठाना चाहिए था, जिसे विपक्ष ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के कारण पीछे छोड़ दिया है। इस पर चर्चा होना आवश्यक है। देश की जनता को सत्ता और विपक्ष के बीच चल रही राजनीतिक लड़ाई से सचेत रहना चाहिए और उन्हें अपनी एकमात्र अम्बेडकरवादी बहुजन समाज पार्टी से जुड़ना चाहिए, जो 'सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय' के सिद्धांतों पर चल रही है।"
