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संसद में जन्म और मृत्यु पंजीकरण विधेयक का पारित होना, हंगामे के बीच कार्यवाही स्थगित

संसद के मानसून सत्र में जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक-2026 को ध्वनिमत से पारित किया गया, जबकि विपक्ष ने सरकार के खिलाफ हंगामा किया। प्रश्नकाल नहीं हो सका और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। जानें इस विधेयक का उद्देश्य और पंजीकरण प्रक्रिया में होने वाले बदलाव के बारे में।
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संसद में हंगामे का माहौल


मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बनी रही। विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों पर सरकार पर हमला किया, जबकि सरकार ने महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। हंगामे के बीच, लोकसभा ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक-2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। शोर-शराबे के कारण प्रश्नकाल नहीं हो सका, जिसके चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।


विपक्ष का प्रदर्शन

जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसद प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, चढ़ावा चोरी और अन्य मुद्दों को लेकर नारेबाजी करते हुए आसन के सामने पहुंच गए। अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों से प्रश्नकाल चलाने की अपील की, लेकिन विपक्ष ने अपने रुख पर कायम रहते हुए कार्यवाही को दोपहर तक स्थगित करने पर मजबूर कर दिया।


बिना चर्चा के विधेयक का पारित होना

दोपहर में सदन की बैठक फिर से शुरू हुई, लेकिन विपक्ष का विरोध जारी रहा। इसी दौरान, सरकार ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक-2026 को चर्चा और पारित कराने के लिए पेश किया। भारी शोर के बीच विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। सरकार ने कहा कि चर्चा की इच्छा थी, लेकिन विपक्ष ने इसमें भाग नहीं लिया।


राज्यसभा में भी गतिरोध

राज्यसभा में भी दिनभर गतिरोध बना रहा। विपक्ष ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, राम मंदिर चढ़ावा विवाद और अन्य मुद्दों पर सरकार को घेर लिया। लगातार नारेबाजी के कारण कोई विधायी कार्य नहीं हो सका। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन में व्यवधान पर नाराजगी जताई और कार्यवाही को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया।


संशोधन विधेयक का उद्देश्य

नए संशोधन का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के समय पर पंजीकरण को बढ़ावा देना और देर से होने वाले पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है। नए प्रावधान के अनुसार, यदि सूचना दो वर्ष से अधिक देरी से दी जाती है, तो पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही संभव होगा।


पंजीकरण प्रक्रिया में बदलाव

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, एक वर्ष से अधिक देरी वाले मामलों में जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति से पंजीकरण हो सकता है। संशोधन लागू होने के बाद, यह प्रक्रिया केवल दो वर्ष तक की देरी वाले मामलों पर लागू रहेगी। दो वर्ष से अधिक विलंब होने पर न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य होगी। इस बीच, मानसून सत्र में सरकार ने कई महत्वपूर्ण विधेयकों को दोनों सदनों से पारित करा लिया है।