सऊदी अरब की ऊर्जा संरचना पर बड़ा ड्रोन हमला, ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन बंद
सऊदी अरब में ऊर्जा ढांचे पर हमला
रियाद: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, सऊदी अरब के महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे पर एक बड़ा हमला हुआ है। ड्रोन हमलों के कारण, सऊदी अरब ने अपनी प्रमुख ईस्ट-वेस्ट (East-West) ऑयल पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। यह पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्रों से कच्चे तेल को लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती है। यह पाइपलाइन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सऊदी अरब को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बाइपास करते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की निर्बाध आपूर्ति करने की अनुमति देती है।
हमले में पंपिंग स्टेशनों को नुकसान
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस समन्वित हमले में पाइपलाइन के रास्ते में कई प्रमुख पंपिंग स्टेशनों को नुकसान पहुंचा है। सैटेलाइट तस्वीरों में एक स्टेशन पर भीषण आग और दूसरे हिस्से से काला धुआं उठता हुआ देखा गया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि ये ड्रोन इराक की दिशा से आए थे। हमले में कुछ लोग घायल हुए हैं और बुनियादी ढांचे को आंशिक क्षति पहुंची है, जिसकी मरम्मत युद्धस्तर पर की जा रही है। सऊदी अरब ने इराकी प्रधानमंत्री की अपील पर तुरंत जवाबी सैन्य कार्रवाई से बचने का निर्णय लिया है, ताकि इराकी सरकार को अपनी सीमा से होने वाले आतंकी हमलों को रोकने का अवसर मिल सके। इराक ने भी इस हमले की निंदा की है और उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का महत्व
ईरानी गतिविधियों और हमलों के कारण होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। ऐसे समय में, ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन सऊदी तेल निर्यात का सबसे बड़ा सहारा बन गई है। जून की शुरुआत तक, इस पाइपलाइन के माध्यम से यानबू पोर्ट तक रोजाना 50 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल भेजा जा रहा था। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि पंपिंग स्टेशनों की तकनीकी मरम्मत संभव है, लेकिन वास्तविक नुकसान का आकलन अभी चल रहा है। इस बीच, सऊदी अरब ने पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) को सूचित किया है कि उसका कच्चा तेल उत्पादन पिछले महीने 1990 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
हूतियों का नियंत्रण और उसके प्रभाव
सऊदी अरब के लिए संकट यहीं समाप्त नहीं होता। यमन के हूती विद्रोहियों ने बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट के बीच स्थित रणनीतिक मायून द्वीप (पेरिम द्वीप) पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। इससे पहले, हूतियों ने मोचा शहर पर भी कब्जा किया था। बाब-अल-मंदेब के रास्ते जहाजों का आवागमन पहले से ही 60 प्रतिशत तक घट चुका है। अब इस महत्वपूर्ण चोकपॉइंट पर हूतियों का दबदबा होने से सऊदी तेल निर्यातकों को अफ्रीका का चक्कर लगाकर लंबा और महंगा समुद्री रास्ता अपनाना पड़ सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि
इन गंभीर भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। तेल की बढ़ती कीमतों से उत्साहित ईरान अब क्षेत्रीय वार्ताओं में कड़ा रुख अपना रहा है। तेहरान ने सऊदी अरब से हूती-नियंत्रित क्षेत्रों की नाकाबंदी हटाने और सीधे बातचीत की मांग की है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ किसी भी व्यापक समझौते में यमन को शामिल करना अनिवार्य होगा। दूसरी ओर, सऊदी अरब ने कहा है कि वह बातचीत के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के अधिकार से कोई समझौता नहीं करेगा।
