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सारागढ़ी युद्ध के शहीदों की शहादत को अमृतसर में श्रद्धांजलि

अमृतसर में सारागढ़ी युद्ध के 21 शहीद सैनिकों की शहादत को याद करते हुए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस समारोह में एनसीसी कैडेट्स और विद्यार्थियों ने भाग लिया और शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए गुरबाणी कीर्तन और देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में मेयर जतिंदर सिंह मोती भाटिया और फाउंडेशन के प्रमुख गुरिंदर पाल सिंह जोसन ने भी भाग लिया। जोसन ने शहीदों के जीवन पर शोध करने की जानकारी साझा की और पाठ्यक्रम में सारागढ़ी के इतिहास को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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सारागढ़ी युद्ध के वीरों को याद करते हुए कार्यक्रम


अमृतसर में सारागढ़ी युद्ध के 21 शहीद सैनिकों की शहादत को सम्मानित करने के लिए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह समारोह गोल्डन गेट स्थित स्मारक पर हुआ, जिसमें एनसीसी कैडेट्स, छात्र और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए गुरबाणी कीर्तन और देशभक्ति गीतों का आयोजन किया गया।


गोल्डन गेट पर शहीदों को श्रद्धांजलि

सारागढ़ी फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में 21 शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। फाउंडेशन के प्रमुख गुरिंदर पाल सिंह जोसन विशेष रूप से अमेरिका से अमृतसर आए थे। इस अवसर पर अमृतसर के मेयर जतिंदर सिंह मोती भाटिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सेंट सोल्जर एलीट कॉन्वेंट स्कूल, जंडियाला गुरु के एनसीसी कैडेट्स ने भी शहीदों को सलामी दी।


कीर्तन और देशभक्ति गीतों के माध्यम से श्रद्धांजलि

इस समारोह में विद्यार्थियों ने गुरबाणी कीर्तन और देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। जोसन ने बताया कि उन्होंने सारागढ़ी के 21 सैनिकों के जीवन और उनके परिवारों पर गहन शोध किया है। उन्होंने सैनिकों के परिवारों को खोजने के साथ-साथ ऐतिहासिक विवरणों के आधार पर उनके चित्र भी तैयार करवाए, ताकि उनकी कहानी को व्यापक रूप से साझा किया जा सके।


इतिहास को पाठ्यक्रम में शामिल करने की आवश्यकता

गुरिंदर पाल सिंह जोसन ने सारागढ़ी के इतिहास को संरक्षित करने के प्रयासों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि लगभग चार साल पहले उन्होंने कक्षा 4 और 8 के पाठ्यक्रम में सारागढ़ी से संबंधित शोध सामग्री शामिल करने के लिए चीफ खालसा दीवान को एक मसौदा प्रस्तुत किया था। उनके अनुसार, इसे पाठ्यक्रम में शामिल करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक शोध प्रकाशित नहीं हुआ है।


स्मारक के रखरखाव पर ध्यान देने की आवश्यकता

मेयर जतिंदर सिंह मोती भाटिया ने कहा कि सारागढ़ी के 21 सैनिकों ने सीमित हथियारों और गोला-बारूद के बावजूद बड़ी संख्या में कबायली लड़ाकों का सामना किया और अपनी जान की कुर्बानी दी। उन्होंने जोसन के शोध और दस्तावेजीकरण के प्रयासों की सराहना की। इसके साथ ही गोल्डन गेट स्थित स्मारक के बेहतर रखरखाव पर विशेष ध्यान देने का आश्वासन दिया। स्कूल के निदेशक मंगल सिंह किशनपुरी ने भी कहा कि उनका संस्थान विद्यार्थियों को पंजाब के इतिहास से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है।