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सुखना वेटलैंड के संरक्षण के लिए नई रणनीति का विकास

चंडीगढ़ के सुखना वेटलैंड के संरक्षण के लिए प्रशासन ने एक नई रणनीति विकसित की है। इस पहल में पर्यावरण संरक्षण, जल क्षमता में वृद्धि और जैव विविधता की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया गया है। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों का उपयोग करें। इसके अलावा, प्रवासी पक्षियों के संरक्षण और जल भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए भी योजनाएं बनाई गई हैं। जानें इस महत्वपूर्ण बैठक के बारे में और क्या कदम उठाए गए हैं।
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सुखना वेटलैंड के संरक्षण की नई पहल


चंडीगढ़: चंडीगढ़ के महत्वपूर्ण सुखना वेटलैंड के संरक्षण और दीर्घकालिक विकास के लिए प्रशासन ने एक नई रणनीति तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पंजाब के राज्यपाल और यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की अध्यक्षता में वेटलैंड अथॉरिटी की बैठक में पर्यावरण संरक्षण, जल क्षमता में वृद्धि, जैव विविधता की सुरक्षा और वैज्ञानिक प्रबंधन जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। अधिकारियों को विभिन्न परियोजनाओं को समन्वित तरीके से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।


संरक्षण कार्यों की समीक्षा

बैठक में वेटलैंड अथॉरिटी की पिछली बैठक के निर्णयों की प्रगति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही अथॉरिटी के आधिकारिक लोगो को अंतिम रूप दिया गया। विभिन्न विभागों ने सुखना वेटलैंड के संरक्षण, पारिस्थितिकीय पुनर्स्थापन और कैचमेंट क्षेत्र के वैज्ञानिक प्रबंधन से संबंधित कार्यों की जानकारी प्रस्तुत की। कांसल डायवर्जन नहर के रखरखाव और मृदा अपरदन रोकने पर भी विस्तार से चर्चा की गई।


वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर

प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वेटलैंड में खरपतवार नियंत्रण के लिए केवल वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों का उपयोग किया जाए। उनका कहना था कि किसी भी कदम से जलीय जैव विविधता प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उद्देश्य यह है कि प्राकृतिक संतुलन बनाए रखते हुए वेटलैंड की पारिस्थितिकी को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके।


प्रवासी पक्षियों के लिए बेहतर वातावरण

बैठक में प्रवासी पक्षियों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि उनके प्राकृतिक आवास को और बेहतर बनाया जाए। इसके साथ ही वेटलैंड परिसर में विभिन्न प्रवासी पक्षियों की जानकारी देने वाले सूचना पैनल लगाने की योजना पर भी सहमति बनी, ताकि पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा मिल सके।


मत्स्य विविधता में वृद्धि

पंजाब विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग द्वारा किए गए सर्वेक्षण में सुखना वेटलैंड में 20 से अधिक मछलियों की प्रजातियां दर्ज की गईं। इनमें मृगल कार्प सबसे अधिक पाई गई। सर्वे के अनुसार कुल मत्स्य विविधता में 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी देशी प्रजातियों की रही। इसके आधार पर मत्स्य विभाग ने कतला, रोहू और मृगल की 10 हजार फिंगरलिंग्स वेटलैंड में छोड़ी हैं।


जल भंडारण क्षमता में वृद्धि

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि सुखना वेटलैंड के रेगुलेटरी छोर पर वैज्ञानिक तरीके से डी-सिल्टिंग का कार्य जारी है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद वेटलैंड की जल भंडारण क्षमता में लगभग 5.4 हेक्टेयर-मीटर की वृद्धि होने की संभावना है। प्रशासन का मानना है कि इससे जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन दोनों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा.