सुप्रीम कोर्ट के फैसले से 862 शिक्षकों को मिलेगा वेतन आयोग का बकाया एरियर
महत्वपूर्ण निर्णय से शिक्षकों को मिली राहत
चंडीगढ़: सुप्रीम कोर्ट द्वारा 21 अप्रैल को दिए गए महत्वपूर्ण निर्णय के अनुपालन में, स्कूल शिक्षा विभाग ने 862 कार्यरत शिक्षकों को छठे और सातवें वेतन आयोग के तहत बकाया एरियर जारी करने के निर्देश दिए हैं। बुधवार को इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग के निदेशक नीतीश सिंगला ने आधिकारिक आदेश जारी किया। इस फैसले के बाद, लगभग एक दशक से कानूनी लड़ाई लड़ रहे शिक्षकों को वित्तीय और मानसिक राहत मिली है।
पेपर लीक और कानूनी संघर्ष
2015 की शिक्षक भर्ती पर पेपर लीक का मामला
स्कूल शिक्षा विभाग ने अगस्त 2015 में एनटीटी (NTT), जेबीटी (JBT) और टीजीटी (TGT) के 1149 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी की थी। हालांकि, मई 2017 में भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने के कारण चंडीगढ़ प्रशासन ने भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया। चयनित शिक्षकों ने इस फैसले के खिलाफ केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) में याचिका दायर की, जहां प्रशासन के आदेश पर रोक लगा दी गई।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
कैट के स्थगन आदेश के खिलाफ शिक्षा विभाग ने पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लंबी सुनवाई के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने 21 अप्रैल को शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए भर्ती को बहाल रखने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि प्रशासन पेपर लीक के मामले में कोई ठोस सबूत पेश करने में असफल रहा है।
वेतन आयोग का बकाया एरियर
छठा और सातवां वेतन आयोग
स्कूल शिक्षा विभाग के निदेशक द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, सभी 862 पात्र शिक्षकों को 1 जनवरी 2016 से छठे वेतन आयोग के तहत संशोधित वेतनमान का एरियर मिलेगा। इसके अलावा, 1 अप्रैल 2022 से शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग का पूरा लाभ और बकाया भुगतान भी किया जाएगा। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को वित्तीय गणना पूरी कर जल्द से जल्द राशि जारी करने के निर्देश दिए हैं।
जांच में फंसे उम्मीदवारों की स्थिति
52 उम्मीदवारों को नहीं मिली राहत
पेपर लीक मामले की पुलिस जांच के दौरान 52 उम्मीदवारों के नाम संदिग्ध के तौर पर सामने आए थे। कैट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी को भर्ती में बहाल करने से इनकार कर दिया। इसके चलते कई चयनित शिक्षक दूसरे राज्यों में नौकरी करने चले गए या विदेश में बस गए। वर्तमान में केवल 862 शिक्षक ही कार्यरत हैं, जिन्हें अब सरकार बकाया एरियर का भुगतान करने जा रही है।
