Newzfatafatlogo

सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट, वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का असर

सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता और डॉलर की मजबूती है। सोमवार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इन कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव देखा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर की मजबूती ने इनकी कीमतों को प्रभावित किया है। आगे चलकर, निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रमों और आर्थिक संकेतकों पर रहेगी।
 | 

सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट

मुंबई : वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता और डॉलर की मजबूती के चलते सोमवार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखी गई। शुरुआती कारोबार में दोनों कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव बना रहा।


मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर 5 अगस्त 2026 डिलीवरी वाला सोना पिछले बंद भाव 1,43,478 रुपये प्रति 10 ग्राम की तुलना में गिरकर 1,42,633 रुपये पर खुला। सुबह के कारोबार में यह 1,42,064 रुपये प्रति 10 ग्राम तक गिर गया। कारोबार के दौरान सोने ने 1,41,557 रुपये का न्यूनतम और 1,43,478 रुपये का अधिकतम स्तर छुआ।


इसी तरह, 4 सितंबर 2026 डिलीवरी वाली चांदी भी दबाव में रही। यह पिछले बंद भाव 2,22,664 रुपये प्रति किलोग्राम से गिरकर 2,18,648 रुपये पर खुली और बाद में 2,18,476 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार करती नजर आई। सत्र के दौरान चांदी का न्यूनतम स्तर 2,17,277 रुपये प्रति किलोग्राम रहा।


अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं में कमजोरी का रुख बना रहा। कॉमेक्स पर सोने और चांदी दोनों की कीमतों में गिरावट आई, जिससे घरेलू बाजार की धारणा भी प्रभावित हुई।


बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, डॉलर इंडेक्स में मजबूती और वैश्विक निवेशकों की बदलती रणनीति के कारण सोने और चांदी में मुनाफावसूली देखने को मिली। मजबूत डॉलर आमतौर पर सोने जैसी धातुओं को अन्य मुद्राओं में महंगा बनाता है, जिससे उनकी मांग पर असर पड़ता है।


विश्लेषकों का कहना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है। हालांकि, ऐसे घटनाक्रमों का सोने और चांदी की कीमतों पर प्रभाव कई कारकों—जैसे डॉलर की चाल, बॉंड यील्ड और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता—पर निर्भर करता है। इसलिए आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम और प्रमुख आर्थिक संकेतकों पर बनी रहेगी।