हरिद्वार में महिला श्रद्धालु के वीडियो पर विवाद: एआई से छेड़छाड़ का मामला
हरिद्वार में गंगा स्नान का वीडियो विवादित
हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार के हरकी पैड़ी में गंगा स्नान कर रही एक महिला श्रद्धालु का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें एआई द्वारा उसे सेमीन्यूड दिखाया गया है। एक महिला ने दावा किया है कि यह वीडियो उसका है और उसने हरियाणा क्राइम ब्रांच में इसकी शिकायत की है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इस मामले की पुष्टि नहीं की है। इस वायरल वीडियो पर कई सवाल उठ रहे हैं। श्री गंगा सभा ने इसे धार्मिक आस्था पर हमला बताते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की है।
वीडियो की उत्पत्ति और विवाद
गंगा घाट पर महिला के स्नान का वीडियो कब का है, इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है, लेकिन श्री गंगा सभा ने पुष्टि की है कि यह वीडियो हरकी पैड़ी के मालवीय घाट का है। बताया जा रहा है कि किसी ने महिला के स्नान का वीडियो चुपके से रिकॉर्ड किया और उसे इंटरनेट पर वायरल कर दिया। इसके बाद, शरारती तत्वों ने इस वीडियो को डाउनलोड कर उसमें छेड़छाड़ की। मूल वीडियो में महिला ने सलवार सूट पहना हुआ था, जबकि संशोधित वीडियो में उसे सेमीन्यूड दिखाया गया है।
हरिद्वार में आक्रोश
हरिद्वार के निवासियों में नाराजगी
वीडियो के वायरल होने के बाद हरिद्वार के लोगों में आक्रोश फैल गया है। एक महिला, सोनम यादव, ने दावा किया है कि यह वीडियो उसका है और उसने हरियाणा साइबर थाने में शिकायत की है। उसका आरोप है कि हरकी पैड़ी में उसके स्नान के वीडियो को एआई से छेड़छाड़ करके सोशल मीडिया पर वायरल किया गया है। हालांकि, पुलिस की तरफ से इस मामले की पुष्टि अभी बाकी है।
श्री गंगा सभा की प्रतिक्रिया
धर्म पर आघात का आरोप
श्री गंगा सभा ने इस मामले में कार्रवाई की मांग की है। अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा कि वायरल वीडियो देखकर उन्हें गहरा दुख हुआ है। उन्होंने कहा कि एआई के माध्यम से माताओं और बहनों के चित्रों को इस तरह से प्रदर्शित करना निंदनीय है। हरिद्वार के निवासियों के लिए यह चिंता का विषय है। उन्होंने शासन से मांग की है कि वीडियो वायरल करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
फैक्ट चेक और वीडियो की सच्चाई
हालांकि, फैक्ट चेक के दौरान एक अन्य वीडियो सामने आया है, जिसमें दावा किया गया है कि महिला का स्नान का वीडियो असली है, जबकि बाद में वायरल किया गया वीडियो फर्जी है। इस दावे के बाद एआई तकनीक के दुरुपयोग पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं की गई है और वास्तविकता की जांच के बाद ही स्पष्टता आएगी। धार्मिक स्थलों पर इस तरह के वीडियो के प्रसार से तीर्थ पुरोहितों में नाराजगी है।
