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हरियाणवी रागनी गायक पेप्सी शर्मा का निधन, संगीत जगत में शोक की लहर

हरियाणवी लोक संगीत के प्रसिद्ध गायक पेप्सी शर्मा का आकस्मिक निधन हो गया है। दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ, जिससे हरियाणा और उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। पेप्सी शर्मा की जुगलबंदी सपना चौधरी के साथ बेहद लोकप्रिय थी, और उनकी गायकी में ग्रामीण जीवन की सच्चाई और किसानों का संघर्ष झलकता था। उनके निधन पर कई कलाकारों ने श्रद्धांजलि दी है, और उनकी कला हमेशा जीवित रहेगी।
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हरियाणवी रागनी गायक पेप्सी शर्मा का निधन, संगीत जगत में शोक की लहर

पेप्सी शर्मा का आकस्मिक निधन

नई दिल्ली: हरियाणवी लोक संगीत और रागनी क्षेत्र से एक दुखद समाचार सामने आया है। प्रसिद्ध रागनी गायक पेप्सी शर्मा का सोमवार सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द हुआ, जिसके बाद उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, डॉक्टरों की सभी कोशिशों के बावजूद, वे उन्हें बचाने में असफल रहे। उनके निधन से हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है।


सपना चौधरी के साथ उनकी जुगलबंदी

सपना चौधरी के साथ हिट थी जुगलबंदी, दीवाने थे लोग

पेप्सी शर्मा रागनी जगत में एक प्रमुख नाम थे। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे 'बिग बॉस' फेम सपना चौधरी के साथ स्टेज पर जुगलबंदी करते थे, जो हमेशा सुपरहिट होती थी। जब भी दोनों किसी सांस्कृतिक कार्यक्रम में साथ होते थे, तो दर्शकों की भारी भीड़ उन्हें देखने के लिए उमड़ पड़ती थी।


अमरोहा के पतला गांव से उभरे

अमरोहा के पतला गांव से निकलकर मचाई थी धूम

पेप्सी शर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के पतला गांव में हुआ था। उन्होंने अपनी दमदार आवाज से दशकों तक लोगों के दिलों पर राज किया। उनके गाने ग्रामीण जीवन की सच्चाई, किसानों के संघर्ष और पारिवारिक मूल्यों को दर्शाते थे, जिससे हर वर्ग के लोग उनसे जुड़ाव महसूस करते थे।


कलाकारों ने दी श्रद्धांजलि

लोक संगीत जगत में अपूरणीय क्षति, कलाकारों ने दी श्रद्धांजलि

पेप्सी शर्मा के निधन पर पश्चिम उत्तर प्रदेश के रागनी आयोजकों और विभिन्न कलाकारों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। रागनी गायक सुभाष खटाना ने कहा कि उनकी गायकी में केवल सुर और ताल नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की मिट्टी की खुशबू और किसानों का दर्द भी सुनाई देता था। श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित कलाकारों ने कहा कि भले ही वे इस दुनिया से चले गए हों, लेकिन उनकी कला हमेशा जीवित रहेगी। हरियाणवी लोक परंपरा की प्रसिद्ध पंक्ति 'नाम रहैगा नेक कमाई का, तन तो मिट्टी हो जावेगा' आज उनके जीवन पर पूरी तरह सटीक बैठती है।