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हरियाणा के 657 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में CBI की नई खोजें

हरियाणा के 657 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में CBI ने महत्वपूर्ण सुराग खोजे हैं। जांच में तीन महिलाओं के बयान शामिल हैं, जो महंगी पार्टियों और सरकारी धन के हेरफेर से जुड़े हैं। CBI अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि इस घोटाले में शामिल लोगों को क्या लाभ मिला। क्या ये पार्टियां सरकारी धन से आयोजित की गई थीं? जानें इस मामले के सभी पहलुओं के बारे में।
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हरियाणा का 657 करोड़ रुपये का बैंक घोटाला


हरियाणा के 657 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच: CBI ने हरियाणा के 657 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच में कुछ महत्वपूर्ण सुराग प्राप्त किए हैं। अब यह मामला केवल बैंक खातों और धन के हेरफेर तक सीमित नहीं रह गया है। CBI की चार्जशीट में तीन महिलाओं के बयान शामिल हैं, जिनमें महंगी पार्टियों, होटल में ठहरने और महिला डांसरों को बुलाने की जानकारी सामने आई है। CBI का आरोप है कि कुछ सरकारी और बैंक अधिकारियों ने मिलकर सरकारी धन को गलत तरीके से स्थानांतरित किया। जांच एजेंसी अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि इस घोटाले में शामिल लोगों को क्या लाभ मिला।


657 करोड़ रुपये का घोटाला क्या है?

इस मामले को सरल भाषा में समझें। CBI के अनुसार, हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के बैंक खातों में मौजूद सरकारी धन को गलत तरीके से स्थानांतरित किया गया। हरियाणा से जुड़े फंड डायवर्जन की राशि लगभग 504 करोड़ रुपये है, जबकि चंडीगढ़ से जुड़े मामले में यह राशि 153 करोड़ रुपये है। दोनों मामलों को मिलाकर कुल राशि 657 करोड़ रुपये बनती है। CBI ने सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ बैंक अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया है।


रिभव ऋषि पर आरोप

CBI की जांच में रिभव ऋषि का नाम प्रमुखता से उभरा है। वह IDFC First Bank की चंडीगढ़ स्थित शाखा का ब्रांच मैनेजर था। CBI का आरोप है कि उसने सरकारी विभागों के खातों को इस शाखा में लाने और संदिग्ध धन के ट्रांसफर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जांच एजेंसी यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि सरकारी धन की हेराफेरी में शामिल लोगों के बीच क्या आर्थिक और व्यक्तिगत संबंध थे।


महिलाओं के बयान

CBI की चार्जशीट में तीन महिलाओं के बयान शामिल हैं, जिन्हें W-1, W-2 और W-3 के नाम से जाना जाता है। W-1 ने बताया कि जीरकपुर में पार्टियों का आयोजन होता था और उसे महिला डांसरों को बुलाने की जिम्मेदारी दी जाती थी। पार्टियों में डांस के अलावा, कुछ महिलाएं मेहमानों के साथ प्राइवेट समय भी बिताती थीं। W-1 ने यह भी दावा किया कि पार्टियों पर 2.5 से 3 करोड़ रुपये तक खर्च होता था।


W-2 और W-3 के खुलासे

W-2 ने CBI को बताया कि उसे एक बार पंकज अग्रवाल के लिए चंडीगढ़ बुलाया गया था। मोहाली के एक होटल में सुइट बुक किया गया था। उसने यह भी कहा कि कमरे के बाहर एक सुरक्षाकर्मी तैनात था। W-2 के बयान में हरियाणा के विकास एवं पंचायत विभाग के तत्कालीन अधीक्षक नरेश कुमार भुवानी का नाम भी आया है। W-3 ने बताया कि उसने दो पार्टियों में भाग लिया था और उसे प्रत्येक पार्टी के लिए 10 से 12 हजार रुपये दिए गए थे।


पंकज अग्रवाल की भूमिका

IAS अधिकारी पंकज अग्रवाल भी इस मामले में आरोपी हैं। CBI का आरोप है कि उन्होंने हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद और हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड से जुड़े बैंक खातों को IDFC First Bank की एक विशेष शाखा में खुलवाने में मदद की। जांच एजेंसी का दावा है कि इन खातों के माध्यम से 60 करोड़ रुपये से अधिक की राशि गलत तरीके से निकाली गई। CBI ने पंकज अग्रवाल को गिरफ्तार किया था और बाद में हरियाणा सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया।


क्या सरकारी धन से हुई थीं पार्टियां?

इस मामले का सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ये सभी पार्टियां सरकारी धन से आयोजित की गई थीं? CBI यह जांच कर रही है कि घोटाले में शामिल लोगों को पैसे के अलावा अन्य लाभ क्या मिले। इनमें होटल बुकिंग, पार्टियां और अन्य महंगी सुविधाएं शामिल हैं। हालांकि, यह अभी साबित नहीं हुआ है कि इन पार्टियों का खर्च सीधे सरकारी घोटाले के पैसे से किया गया था।


बैंक अधिकारियों पर आरोप

इस मामले में जांच केवल सरकारी अधिकारियों तक सीमित नहीं है। CBI ने कुछ बैंक अधिकारियों को भी आरोपी बनाया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने सरकारी विभागों के खाते खोलने और संदिग्ध लेनदेन को रोकने के बजाय उन्हें आगे बढ़ने दिया। CBI अब बैंक रिकॉर्ड, खातों के लेनदेन, कॉल रिकॉर्ड, WhatsApp चैट और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है।